दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला/नैनपुर।
मंडला–नैनपुर प्रस्तावित हाईवे एवं बाईपास निर्माण के लिए अधिग्रहित की जा रही कृषि भूमि के मूल्यांकन और मुआवजा निर्धारण को लेकर क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर प्रभावित किसानों ने एक बड़ी किसान महापंचायत आयोजित कर प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की। महापंचायत में किसानों ने एक स्वर में आरोप लगाया कि बिना सही मूल्यांकन के उनकी जमीन का बेहद कम मुआवजा तय किया जा रहा है, जो किसानों के साथ खुला अन्याय है।
किसानों का कहना है कि हाईवे और बाईपास परियोजना के लिए अब तक तीन अलग-अलग सर्वे किए जा चुके हैं, लेकिन अधिकांश किसानों को आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किसकी कितनी जमीन अधिग्रहित होगी और किस सीमा तक चिन्हांकन किया गया है। कई स्थानों पर अब तक अंतिम मुनारा (सीमा चिन्हांकन) भी नहीं किया गया है, जिससे किसानों में असमंजस और नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
महापंचायत में किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर मात्र 2 से 3 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा तय करने की चर्चा है, जबकि क्षेत्र की जमीन अत्यंत उपजाऊ और सिंचित है तथा सड़क किनारे स्थित होने के कारण इसका वास्तविक बाजार मूल्य कई गुना अधिक है। किसानों का कहना है कि ऐसे में कम मुआवजा तय करना सीधे-सीधे उनके अधिकारों के साथ अन्याय है।
किसानों ने उदाहरण देते हुए बताया कि धतूरा हल्का नंबर 36 में 31 मार्च 2022 को हुई एक रजिस्ट्री में लगभग 15 डिसमिल भूमि 8 लाख 25 हजार रुपये में खरीदी गई, जिस पर 18,106 रुपये का स्टाम्प शुल्क जमा हुआ है। किसानों का कहना है कि जब क्षेत्र में इतनी ऊंची कीमत पर जमीन की खरीद-फरोख्त हो रही है, तो मुआवजा तय करते समय ऐसी रजिस्ट्रियों को नजरअंदाज करना गलत है।
महापंचायत में यह भी मुद्दा उठाया गया कि कई जमीनों में बंदोबस्ती, त्रुटि सुधार और डिजिटल रिकॉर्ड में भारी असमानताएं हैं। साथ ही खेतों में मौजूद बोरवेल, पेड़-पौधे, तालाब, मकान और अन्य संरचनाओं का भी वास्तविक मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है।
किसानों ने यह भी कहा कि मुआवजा वर्ष 2022 के रेट के आधार पर तय किया जा रहा है, जबकि वर्तमान समय में 2026 तक की बाजार दरों और रजिस्ट्रियों को आधार बनाकर मुआवजा निर्धारित किया जाना चाहिए।
महापंचायत में किसानों ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 के तहत की जा रही है, जिसमें स्पष्ट प्रावधान हैं कि
धारा 23 के अनुसार भूमि का वास्तविक बाजार मूल्य निर्धारित किया जाना अनिवार्य है।
धारा 30 और 31 के अनुसार किसानों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लाभ दिए जाने चाहिए।
इसके अलावा इस कानून की अनुसूची 1, 2 और 3 में मुआवजा और पुनर्वास से संबंधित विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं, जिनका पालन इस परियोजना में नहीं किया जा रहा है, ऐसा किसानों का आरोप है।
किसानों ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अगस्त 2015 के राष्ट्रीय राजमार्ग भूमि अधिग्रहण गजट नोटिफिकेशन में भी स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधान लागू होंगे, लेकिन स्थानीय स्तर पर इनका पालन नहीं किया जा रहा है।
चूंकि यह क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र में आता है, इसलिए पेसा एक्ट 1996 के तहत ग्राम सभा की सहमति आवश्यक है। किसानों का आरोप है कि अधिकांश ग्राम सभाओं में इस विषय पर विधिवत सहमति तक नहीं ली गई है।
किसान महापंचायत की प्रमुख मांगें
प्रभावित क्षेत्रों की उच्चतम रजिस्ट्री को मुआवजा निर्धारण का आधार बनाया जाए।
वर्ष 2026 तक की बाजार दरों के अनुसार मुआवजा तय किया जाए।
अंतिम सर्वे और मुनारा चिन्हांकन सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए।
खेतों में मौजूद पेड़, बोर, तालाब, मकान और अन्य संरचनाओं का सही मूल्यांकन किया जाए।
पेसा क्षेत्र होने के कारण ग्राम सभा की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।
भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की धारा 23, 30, 31 तथा अनुसूची 1, 2 और 3 का पूर्ण पालन किया जाए।
महापंचायत में किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्र के किसान लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इस किसान महापंचायत में नैनपुर और चिरईडोंगरी क्षेत्र के प्रभावित किसानों के साथ वरिष्ठ कांग्रेसी गुलाब उइके, ब्लॉक अध्यक्ष नैनपुर दामोदर ठाकुर, नगर अध्यक्ष धर्मेश, रवि वैष्णव, सत्यम खंडेलवाल, कैलाश परते, रामकिशोर उइके, सूरज जांघेला, शरद, मुलायम सिंह ठाकुर, सुरेंद्र राजपूत सहित क्षेत्र के कई किसान और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
