दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला
मंडला जिले में शासन के स्पष्ट निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए नए लाइसेंसी शराब ठेकेदार खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बिछिया, मवई, नैनपुर और अंजनिया क्षेत्र की देसी व अंग्रेजी शराब दुकानों में उपभोक्ताओं से तय कीमत से अधिक वसूली कर सीधी लूट मचाई जा रही है।
नियमों के मुताबिक हर शराब दुकान में रेट लिस्ट प्रदर्शित करना और हर ग्राहक को बिल देना अनिवार्य है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। दुकानों पर न तो रेट लिस्ट नजर आती है और न ही ग्राहकों को कोई बिल दिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, शराब की बोतलों पर अंकित एमआरपी/एमएसपी से प्रति क्वार्टर 50 रुपये तक अधिक वसूली की जा रही है। यानी हर ग्राहक से रोजाना खुली लूट — और जिम्मेदार मौन!
शिकायतें जारी, कार्रवाई शून्य
स्थानीय लोगों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद आबकारी विभाग के अधिकारी “जानकारी नहीं” या “जांच करेंगे” कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। सवाल उठता है कि आखिर इतनी बड़ी अनियमितता बिना विभागीय मिलीभगत के कैसे संभव है?
ठेका नहीं, अवैध वसूली का लाइसेंस!
नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में लाइसेंस मिलने के बाद ठेकेदारों ने मानो इसे “मनमानी वसूली का अधिकार” समझ लिया है।
बिछिया, नैनपुर और मवई-अंजनिया में जिस तरह से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं, उससे साफ है कि यह केवल दुकानदारों की करतूत नहीं, बल्कि आबकारी विभाग और ठेकेदारों की जुगलबंदी का खेल है।
नशे की लत के साथ अब आर्थिक शोषण भी
पहले ही जिले में शराब की उपलब्धता को लेकर सवाल उठते रहे हैं, अब हालात ये हैं कि लोगों को नशे की लत में धकेलने के बाद उनसे मनमानी कीमत वसूली जा रही है। यह सीधे तौर पर गरीब और मजदूर वर्ग की जेब पर डाका है।
प्रशासन से बड़ा सवाल
क्या जिला प्रशासन इस खुली लूट पर कार्रवाई करेगा?
क्या आबकारी विभाग की भूमिका की जांच होगी?
या फिर “सब सेट है” के खेल में आम जनता यूं ही लुटती रहेगी?
दैनिक रेवांचल टाइम्स इस मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन नींद से जागता है या फिर यह “शराब सिंडिकेट” यूं ही जनता की जेब काटता रहेगा।
वही जब लाइसेंस शराब दुकान से तय मूल्य से अधिक कीमत में बिक रही शराब को लेकर प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी से बात की गई तो उनको कहना है कि दुकानों का ठेका नया हुआ और आप बतला रहे है तो हम दिखवा लेते हैं।
