
राज्यों के साथ समन्वय तेज़ करने, समयबद्ध क्रियान्वयन और रोजगार बढ़ाने पर ज़ोर
नई दिल्ली। भारत सरकार ने देशभर में चल रही बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और रोजगार सृजन से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की। उच्चस्तरीय बैठक में मंत्रालयों को राज्यों के साथ समन्वय और तेज़ करने, परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन तथा जमीनी स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
परियोजनाओं की प्रगति पर गहन मंथन

बैठक में सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, शहरी आवास, जल-स्वच्छता, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी योजनाओं की स्थिति पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि कई परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण स्वीकृति और अंतर-विभागीय अनुमोदनों के कारण देरी देखी जा रही है। सरकार ने इन अड़चनों को दूर करने के लिए स्पष्ट टाइमलाइन तय करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
राज्यों के साथ समन्वय होगा मज़बूत
केंद्र ने राज्यों को “भागीदार” मानते हुए संयुक्त कार्ययोजनाएं बनाने का निर्देश दिया। इसके तहत साप्ताहिक प्रगति समीक्षा, साझा डैशबोर्ड और फील्ड-लेवल टीमों की सक्रियता बढ़ाने की बात कही गई। केंद्र–राज्य समन्वय से न केवल परियोजनाओं की गति बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान भी सामने आएंगे।
रोजगार सृजन प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट किया कि हर इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजना का रोजगार प्रभाव (Employment Impact) आकलन अनिवार्य होगा। निर्माण चरण में प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और सेवाओं में अप्रत्यक्ष नौकरियों को भी बढ़ाने की रणनीति अपनाई जाएगी। कौशल विकास कार्यक्रमों को परियोजनाओं से जोड़कर स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता
बैठक में बजट उपयोग, भुगतान चक्र और ठेकेदारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर भी चर्चा हुई। निर्देश दिए गए कि धनराशि का समय पर उपयोग हो, लंबित भुगतान शीघ्र निपटें और ई-प्रोक्योरमेंट के जरिए प्रतिस्पर्धा व गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
अपेक्षित परिणाम
सरकार का मानना है कि इन कदमों से—
- परियोजनाओं की देरी कम होगी,
- राज्यों में निवेश का माहौल सुधरेगा,
- बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा,
- और समग्र आर्थिक गतिविधि को गति मिलेगी।
अधिकारियों ने कहा कि अगली समीक्षा बैठक में तय लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और आवश्यकतानुसार नीतिगत सुधार किए जाएंगे।
