रिश्वत का रंग… नामांतरण की फ़ाइल पर चढ़े दस हज़ार के नोट!

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रिश्वत का रंग… नामांतरण की फ़ाइल पर चढ़े दस हज़ार के नोट!

हाउसिंग बोर्ड के दफ्तरों में फाइलें इतनी भारी नहीं होतीं, जितनी उन पर रखी जाने वाली घूस की रकम। शुक्रवार को संजीवनी नगर हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में कुछ ऐसा ही हुआ, जब नामांतरण की एक मामूली फाइल पर बाबू ने 10 हजार रुपए चढ़ाने की शर्त रख दी। लेकिन इस बार फाइल के साथ लोकायुक्त की नजर भी उस पर थी… और बाबू रंगेहाथ पकड़ लिया गया।
लोकायुक्त पुलिस की टीम ने रिश्वत लेते हुए हाउसिंग बोर्ड में पदस्थ बाबू अमन कोष्टा को धर दबोचा। कार्रवाई उस समय की गई, जब वह शिकायतकर्ता से खुलेआम 10 हजार रुपये ले रहा था। टीम ने रिश्वत की रकम भी जब्त कर ली है।
अनुकंपा नियुक्ति, लेकिन व्यवहार ‘अनुकंपा’ से परे


डीएसपी नीतू त्रिपाठी ने बताया कि अमन कोष्टा की नियुक्ति अनुकंपा आधार पर हुई थी, लेकिन उसने जनता के साथ कोई ‘अनुकंपा’ नहीं दिखाई। आरोप है कि वह बिना पैसे लिए किसी का नामांतरण नहीं करता था और इस रवैये से लोग लंबे समय से परेशान थे।


शिकायतकर्ता हाकम साहू ने बताया कि वह महाराजपुर स्थित अपने मकान का नामांतरण कराने के लिए पिछले दो महीनों से चक्कर काट रहा था। लेकिन बाबू ने फाइल आगे बढ़ाने के लिए पहले पचास हजार रुपये की मांग की थी। मोलभाव के बाद बात दस हजार पर बनी और यहीं से हाकम साहू ने लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाया।


ट्रैप में फंसा बाबू
शिकायत की जांच के बाद लोकायुक्त एसपी अंजूलता पटले ने टीआई जितेंद्र यादव के नेतृत्व में एक टीम बनाई। शुक्रवार को जैसे ही बाबू ने रिश्वत ली, टीम ने दबिश देकर उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
सवाल सिर्फ एक बाबू का नहीं…


इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर कितने ऐसे ‘बाबू’ सिस्टम में घुस चुके हैं, जो दफ्तर की कुर्सियों को अपनी दुकान समझ बैठे हैं। ये वही लोग हैं, जिनसे जनता को फाइल आगे बढ़ने की उम्मीद होती है… लेकिन ये उम्मीद भी आजकल ‘रेट लिस्ट’ देखकर तय होती है।
अब देखना यह है कि क्या केवल इस एक बाबू को पकड़ने से सिस्टम सुधरेगा, या फिर प्रशासन ऐसे ‘नये नटवरलालों’ की पूरी फेहरिस्त खंगालने की हिम्मत दिखाएगा?
रिपोर्ट मोहम्मद अकरम अंसारी

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