ग्राम पंचायत नरैनी माल में धुंधले बिलों से भुगतान का खेल, सरपंच-सचिव-उपयंत्री की तिकड़ी पर भ्रष्टाचार के आरोप

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स मंडला जिले की कई ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार कागजों से मेल नहीं खाती।

ऐसा ही एक मामला जनपद बिछिया की ग्राम पंचायत नरैनी माल (छीरपानी) से सामने आया है, जहां ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री की कथित मिलीभगत से सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में विकास के नाम पर केवल कागजी लीपापोती की जा रही है और सरकारी योजनाओं के पैसे को मिलकर ठिकाने लगाया जा रहा है।


सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत नरैनी माल में पांचवां राज्य वित्त आयोग मद से लगभग 2 लाख 50 हजार रुपये की लागत से रिखीराम के घर से पीएम सड़क तक ग्रेवल सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया था। इस कार्य की स्वीकृति 27 जनवरी 2024 को दी गई थी। इस निर्माण कार्य में पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव रहा और पंचायत द्वारा एक ही ट्रेडर्स के नाम पर कई बिल लगाकर भारी भुगतान कर दिया गया, जबकि पोर्टल में दर्ज कई बिल स्पष्ट रूप से दिखाई भी नहीं दे रहे हैं।
दस्तावेजों के अनुसार पटैल ट्रेडर्स माधोपुर के नाम पर ग्राम पंचायत द्वारा कुल छह बिलों का भुगतान किया गया है। इन भुगतानों में दिनांक 14 अगस्त 2024 को 42,110 रुपये, 15 जुलाई 2024 को 31,464 रुपये, 15 जुलाई 2024 को 34,960 रुपये, 15 जुलाई 2024 को 33,212 रुपये, 15 जुलाई 2024 को 32,775 रुपये तथा 15 जुलाई 2024 को ही 31,464 रुपये का भुगतान शामिल है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन सभी बिलों को देखने पर वे पोर्टल में धुंधले और अस्पष्ट दिखाई देते हैं, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी कर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है ग्रामीणों का सवाल है कि जब कुल स्वीकृत राशि 2 लाख 50 हजार रुपये है, तो केवल एक ही ट्रेडर्स को लगभग दो लाख रुपये से अधिक का भुगतान कैसे कर दिया गया। यदि इतनी बड़ी राशि सामग्री आपूर्ति में खर्च कर दी गई, तो फिर मजदूरों को कितना भुगतान किया गया और क्या वास्तव में उतना कार्य जमीन पर हुआ भी है या नहीं।
इतना ही नहीं, पंचायत के रिकॉर्ड में अन्य संदिग्ध भुगतान भी सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार मूरत सिंह के नाम पर भी कई बिलों का भुगतान किया गया है। बिल क्रमांक 11.6.127 के तहत दिनांक 14 अगस्त 2024 को 8,050 रुपये, दिनांक 16 मार्च 2024 को 13,690 रुपये तथा दिनांक 25 जनवरी 2025 को 7,650 रुपये का भुगतान किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इन बिलों की प्रतियां भी स्पष्ट नहीं हैं और इनमें क्या सामग्री या सेवा दी गई है, यह भी ठीक से समझ में नहीं आता।
इसी तरह सपना किराना एवं जनरल स्टोर्स माधोपुर के नाम पर भी भारी भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार बिल क्रमांक 436 दिनांक 26 अक्टूबर 2025 के तहत सीमेंट लोडिंग एवं परिवहन के नाम पर 200 बैग सीमेंट की ढुलाई 310 रुपये प्रति बैग की दर से दर्शाई गई है, जिसके लिए कुल 62,000 रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा बिल क्रमांक 435 दिनांक 16 अक्टूबर 2025 में भी सीमेंट लोडिंग एवं परिवहन के नाम पर पुनः 200 बैग के हिसाब से 62,000 रुपये का भुगतान किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ही प्रकार के कार्य के लिए इतनी बड़ी राशि का बार-बार भुगतान होना संदेह पैदा करता है। सवाल यह भी उठता है कि क्या वास्तव में इतनी मात्रा में सीमेंट का उपयोग हुआ या केवल बिल लगाकर सरकारी राशि निकाल ली गई। यदि यह सामग्री उपयोग में लाई गई है, तो उसका स्थल पर कोई स्पष्ट प्रमाण क्यों नहीं दिखाई देता।
स्थानीय लोगों के अनुसार पंचायत में केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि अन्य योजनाओं में भी अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। सूत्रों के अनुसार मुताबिक स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, पानी की टंकी साफ सफाई, और मनरेगा के मस्टर रोल में भी भारी गड़बड़ी होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार मस्टर रोल में ऐसे लोगों के नाम दर्ज कर दिए जाते हैं, जिन्होंने काम ही नहीं किया, जबकि वास्तविक मजदूरों को पूरी मजदूरी नहीं मिलती।
ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में शिकायत भी की गई है, लेकिन जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है। आरोप है कि कागजों में ही जांच पूरी कर दी जाती है और दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर वे न्याय के लिए किसके पास जाएं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। उनकी मांग है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए और यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकार ग्रामीण विकास के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं चला रही है और इसके लिए करोड़ों रुपये का बजट भी दिया जा रहा है, लेकिन यदि निचले स्तर पर इस तरह की अनियमितताएं होती रहेंगी तो विकास का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि ग्राम पंचायत नरैनी माल में लगे इन आरोपों की प्रशासन द्वारा कितनी गंभीरता से जांच की जाती है। क्या वास्तव में भ्रष्टाचार की परतें खुलेंगी या फिर जांच के नाम पर एक बार फिर कागजी खानापूर्ति कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है और वे निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

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