मंडला जिले में जनसुनवाई का ढोंग आखिर कब तक और क्यों …?

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जनता की समस्याएं कागजों पर दब रही

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, जनता की छोटी-बड़ी समस्याओं के त्वरित निराकरण का दावा करने वाली जनसुनवाई व्यवस्था यहां पूरी तरह फेल साबित हो रही है। लगातार कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मैदान में डटे हुए हैं, सुधार की अपील कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में कोई सुधार नहीं दिख रहा। आवेदन पत्र लेने के बाद न तो समस्याओं का समाधान होता है और न ही कोई जवाबदेही तय की जाती है। जनता अब सवाल उठा रही है—यह सब कब तक चलेगा? क्या जनसुनवाई सिर्फ दिखावा है या वाकई जन उपयोगी बनेगी?

2025-26 में प्राप्त हुए आवेदनों की उच्च स्तरीय जांच और भौतिक सत्यापन की मांग तेज हो गई है। अगर सत्यापन हुआ तो कई अनियमितताओं की पोल खुल सकती है। ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी, सड़क, विकलांगों की पेंशन, भूमि विवाद जैसी बुनियादी समस्याएं सालों से लंबित पड़ी हैं, लेकिन प्रशासन की नींद नहीं टूट रही।

नल जल योजना में भारी घपले की शिकायतें ग्राम चंदवारा (विकासखंड मोहगाँव) में वर्ष 2021 में एस.बी. इन्फा कंपनी (बालाघाट) को नल जल योजना का ठेका दिया गया। कंपनी को पूरा बिल चुकाया जा चुका है, लेकिन तीन साल बीत जाने के बावजूद योजना चालू नहीं हुई। पूर्व सरपंच संतोष मिश्रा ने आरोप लगाया है कि फर्जी तरीके से लाइन चालू बताकर अनियमितता की गई। उन्होंने कहा, “मैं पीएचई विभाग का वरिष्ठ ठेकेदार हूं, मेरी सभी योजनाएं चालू हैं, लेकिन यहां फर्जीवाड़ा हुआ है।” इसी कंपनी ने ग्राम पड़रिया में भी काम किया, जहां 60% कार्य स्थल पर है, लेकिन 115% बिल लिया गया। बैगा बहुल इलाके में महिला सरपंच होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं।

किसान सम्मान निधि और अन्य शिकायतें
तहसील नैनपुर के ग्राम परसवाड़ा से मनोज सिंह कुशवाह ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि न मिलने की शिकायत की। वहीं नयन पडवार ने नल जल योजना शुरू न होने पर आवाज उठाई।

विकलांगों की मजबूरी अनसुनी

ग्राम घटेरी के वलू प्रसाद नांवरे (50 वर्ष), जो 80% विकलांग हैं, ने जीविकोपार्जन के लिए पंचायत में दुकान की मांग की। बीपीएल परिवार के कर्ताधर्ता होने के बावजूद कोई सहायता नहीं मिल रही। इसी तरह बाबू दास पडवार (ग्राम तुइयापानी) का भूमि विवाद सालों से लंबित है। अराजक तत्वों ने अवैध कब्जा कर निर्माण शुरू कर दिया। पटवारी और आरआई द्वारा फर्जी नाप का आरोप, पुलिस और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं। दो बार जनसुनवाई में आवेदन दिए, लेकिन सिर्फ झूठे आश्वासन मिले।

सड़क के अभाव में टोलावासियों की दुर्दशा

ग्राम पंचायत पटपरा रैयत के ढीमर टोला (जूना मंडला) में रोड नहीं है, सिर्फ पगडंडी। महिलाओं को प्रसव के समय चार लोग उठाकर ले जाते हैं, बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। सरपंच अनसुना कर रहे हैं। ग्राम सिमरिया (कजरवाड़ा) में वर्षों से पेयजल संकट, एकमात्र हैंडपंप खराब होने के बाद कोई नया कूप या बोर नहीं।


जनता की आवाज दब रही है, लेकिन प्रशासन कान में तेल डालकर बैठा है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष बार-बार अपील कर रहे हैं, लेकिन सुधार का नामोनिशान नहीं। क्या यह व्यवस्था सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित है? जनता अब उच्च जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है, ताकि जनसुनवाई वाकई जनता के लिए उपयोगी बने, न कि अधिकारियों की फाइलों का गोरखधंधा!

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