राजधानी में शिक्षा के नाम पर चल रहा गोरख धंधा भोपाल के आयुर्वेद कॉलेज में खुलेआम लूट – सीटें 300 अस्पताल खाली!” ले रहे मनमानी फ़ीस

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A shady business is being run in the name of education in the capital. Open loot is rampant at Bhopal's Ayurveda College – 300 hospital seats are vacant! They are charging exorbitant fees.

दैनिक रेवांचल टाइम्स – भोपाल, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी तंत्र की नाक के नीचे आयुर्वेदिक कॉलेजों ने खुली लूट मचा रखी हैं। हाल यह हैं कि सरकार और सरकारी सिस्टम और नियंम कानून को ठेंगा दिखाते हुए राजधानी के ज्यादातर आयुर्वेदिक कॉलेजों में छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए खुली लूट मची हुई हैं। अभी हाल ही में मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले करीब 27 बच्चें सरकारी तंत्र और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते असमय ही काल के गाल में समा गए। उसके बाद में भी लगता हैं, सरकारी सिस्टम गहरी नींद में डूबा हुआ हैं। इसीलिए तो प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी तंत्र की नाक के नीचे ही आयुर्वेदिक कॉलेज खुली लूट मचा रखी हैं।


ऐसा ही एक मामला राजधानी भोपाल में सेम (SAM)आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी हैं जिसको सरकारी नियम के तहत 300 BAMS सीटों की मान्यता मिली हुई हैं। राजधानी भोपाल में स्थित सेम नामक कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी पर आयुर्वेद शिक्षा के नाम पर गहराती लूट और शैक्षणिक घोटालो की बू सामने आ रही है।


सेम राष्ट्रीय आयुर्वेद आयोग (NCIM) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की सख्त गाइडलाइनों की खुलेआम अवहेलना करते हुए कॉलेज को 300 BAMS सीटों की मान्यता तो मिल गई परंतु इसके विपरीत संबंधित अस्पताल बंद पड़ा हुआ हैं। सेम आयुर्दिक कॉलेज में कभी भी मरीज नहीं मिलते और फैकल्टी हमेशा ही नदारद रहती है।

अस्पताल – ताले में, मरीज – कागज़ों में!

हकीकत:
अस्पताल महीनों से बंद पड़ा है। और मरीज सिर्फ कागजों में ही देखने को मिलते हैं। इसके साथ ही थर्ड कैंपस में IPD की कोई व्यवस्था ही नहीं।
तो वही कॉलेज दावा कागजों में दावा करता है की संबंधित कॉलेज में हर रोज़ 300+ OPD मरीज और दर्जनों IPD भर्तियां होती हैं।”

कॉलेज में शून्य मरीज, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज हैं सैकड़ों।

वही सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार सेम (SAM)आयुर्दिक कॉलेज में जब आप जाकर के देखेंगे तो मरीज शून्य की गिनती में दिखाई देते हैं। परंतु जब आप आवक जावक रजिस्ट्रर चेक करेंगे तो आपको सैकड़ों की संख्या में मरीज़ रिकॉर्ड में दर्ज मिलेंगे।
वहीं संबंधित कॉलेज में विभागों की जिम्मेदारी कुछ गिने-चुने शिक्षक ही निभा रहे हैं और वह भी सिर्फ कागज़ों पर।

A shady business is being run in the name of education in the capital. Open loot is rampant at Bhopal's Ayurveda College – 300 hospital seats are vacant! They are charging exorbitant fees.
A shady business is being run in the name of education in the capital. Open loot is rampant at Bhopal’s Ayurveda College – 300 hospital seats are vacant! They are charging exorbitant fees.

एडमिशन में “पैकेज डील”, फीस में खुला खेल

जानकारी के अनुसार NEET काउंसलिंग के अलावा किसी भी माध्यम से एडमिशन गैरकानूनी है, फिर भी कॉलेज के छात्र छात्रों से 2-4 गुना अधिक फीस वसूल रहा है। लाखों रुपये ऐठ कर कॉलेज प्रबंधक और संचालकों के द्वारा एडवांस सीटो की बुकिंग की जा रही है। कॉलेज प्रबंधन के द्वारा नियंम विरुद्ध और ऊपर लेवल से सब साठगांठ कर और मोटी रिश्वत के चलते ही संभव हो सकता हैं।

गरीब और मेहनती छात्र शोषण के शिकार बन रहे हैं।

वही कॉलेज के सरकारी नियम के विरुद्ध कार्य करने की प्रणाली के चलते गरीब और मेहनती छात्र छात्राएं शोषण का शिकार हो रहे हैं। जिससे कि गरीब और मेहनती छात्र छात्राओं का भविष्य अंधेरे दिख रहा हैं।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते आमजन को मौत को न्योता

राजधानी मुख्यालय जैसी जगह पर सेम (SAM) आयुर्वेदिक कॉलेज का संचालन करने वाले सुरक्षा मानकों की खुले आम धज्जियां उड़ा रहें हैं। कॉलेज में फायर इक्विपमेंट की वैलिडिटी खत्म हैं। जिससे कि खुले तौर पर आमजन को मौत रूपी न्यौता बाटा जा रहा हैं। तो वहीं सेम आयुर्वेदिक कॉलेज में आपदा प्रबंधन के इंतज़ाम शून्य नज़र आता हैं। इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी में यह लापरवाही संभवतः आपराधिक लापरवाही मानी जा सकती है।

आख़िर मान्यता कैसे मिली आयोग पर उठ रहीं है अंगुलिया ..?

जब संबंधित अस्पताल बंद पड़ा हुआ हैं, मरीज ग़ायब हैं, फैकल्टी कम हैं
तो फिर आख़िर संबंधित कॉलेज को 300 सीटों की मान्यता किस रसूखदारी के चलते दी गई यह एक बहुत बड़ा प्रश्न वाचक चिह्न हैं..??
अब सवाल यह हैं कि भ्रष्टाचार के चलते या रुपयों की न्योछावर के चलते क्या निरीक्षण टीम ने सब कुछ जानकर समझकर भी केवल अपने निजी स्वार्थों के चलते आँखें मूँद ली थीं? या फिर सरकारी अधिकारियों की मिलिभगत और भ्रष्टाचार के दम पर सम्बंधित कॉलेज को मान्यता प्राप्त दे दी गई। और इन्हें शिक्षा के नाम पर लूट मचाने के लिए खुला छोड़ दिया गया हैं पर क्यों,

नियम बनाम हकीकत (NCIM गाइडलाइन्स)
नियम नंबर 1. सीट -60
आवश्यक फैकल्टी -36
नम्बर 2 OPD – 120
IPD – 36 मरीज

हकीकत (सेम कॉलेज)-
गिने-चुने शिक्षक, मरीज शून्य

  1. सीट -100
    आवश्यक फैकल्टी -52
    OPD – 200
    IPD – 60 मरीज
  2. सीट – 150
    आवश्यक फैकल्टी- 70
    OPD -300

IPD – 100

  1. सीट – 200
    आवश्यक फैकल्टी – 114
    OPD -500
    IPD – 200
    क्लासरूम खाली, शिक्षण अधूरा इसके साथ ही अन्य कोई भी मानक पूरा नहीं।

कॉलेज प्रबंधन का पक्ष

सेम (SAM) यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता करण पठेर ने दावा किया कि,

“हम NCIM के नियमों का पालन कर रहे हैं। हॉस्पिटल में OPD/IPD सेवा चल रही है। गांव-गांव कैंप लगाकर सेवा कर रहे हैं। फीस सरकार के नियमों के अनुसार ली जा रही है।”
पर ये देख कौन रहा है ये किसकी जिम्मेदारी है निगरानी रखने की क्या सही क्या गलत है ये कौन बतला पायेगा प्रबंधन तो अपना ही अच्छे होने का ढिंढोरा पीट रहा हैं।

लेकिन…
वही जब रेवांचल टाईम्स रिपोर्टर ने सच्चाई उजागर करनी चाही, तो PRO करण पठेर ने फोन कर कहा: “खबर मत चलाइए, बैठकर बात करते हैं।” अगर सब सही चल रहा है तो फिर समाचार प्रकाशित करने से क्यों रोकने के लिए कॉल किया गया
यह कॉल रिकॉर्डिंग रिपोर्टर के पास सुरक्षित है।
आखिर क्या मीडिया को डराया जा रहा है? या फिर रिपोर्टर को डराने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो सकती है।

अब सवाल उठता है कि

क्या मीडिया की आवाज को खरीदने की कोशिश की जा रही है? या छात्र छात्राओं का भविष्य यूं ही लूटा जाना जारी रहेगा? और बच्चों के अभिभावकों के द्वारा बच्चों के भविष्य के लिए कैसे फीस का इंतज़ार करते है ये प्रबंधन को क्या लेना है।

आमजन की मांगें..

  1. सेम यूनिवर्सिटी की मान्यता तत्काल रद्द की जाए।
  2. NCIM और NMC की जांच टीम मौके पर भेजी जाए।
  3. संपूर्ण शैक्षणिक और आर्थिक ऑडिट कराया जाए।
  4. प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।
  5. माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान ले।
    अब सवालिया निशान यह भी हैं की “शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय को आखिर कब तक लूट का अड्डा बने हुआ देखते रहेंगे।
    छात्र, छात्राओं अभिभावक और समाज – सभी की एक ही आवाज जरूरत पड़ी तो सड़कों पर उतरेंगे, लेकिन सच्चाई सामने लाएंगे।” वही दैनिक रेवांचल टाइम्स आपसे विशेष अनुरोध करता हैं की यदि आप छात्र, या भूतपूर्व छात्र छात्रा रह चुके हैं, आप अभिभावक या पूर्व स्टाफ हैं। और आपके पास संबंधित कॉलेज की अन्य कोई जानकारी या सबूत हैं – तो आप हमें संपर्क करें। आपका नाम गोपनीय रखा जाएगा।

मोबाइल न० :- 9340553112

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