सरकारी जमीनों पर कब्जा, प्रशासन की चुप्पी — निवारी में जेसीबी चलाकर दिखावा या बड़ी गड़बड़ी पर पर्दा?

Revanchal
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नैनपुर में अवैध कॉलोनियों का खेल, राजस्व अमले और जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिले विकास खण्ड नैनपुर में जिले में सरकारी जमीनों की बंदरबांट और अवैध कॉलोनियों का खेल अब खुलकर सामने आने लगा है। एक ओर प्रशासन कभी-कभार अतिक्रमण हटाने के नाम पर जेसीबी चलाकर कार्रवाई का दिखावा करता है, तो दूसरी ओर वर्षों से शासकीय भूमि पर कब्जा और अवैध प्लॉटिंग का खेल खुलेआम चलता रहा। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर राजस्व अमला और जिला प्रशासन इतने वर्षों तक क्या कर रहा था?


हाल ही में मंडला सड़क मार्ग स्थित निवारी में पेट्रोल पंप के सामने खसरा नंबर 434 (मद: आम सड़क रास्ता) की सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन ने जेसीबी चलाकर कार्रवाई की।

जानकारी के अनुसार 0.84 हेक्टेयर भूमि में से करीब 0.16 हेक्टेयर क्षेत्र पर सिवनी निवासी चंद्रकांत गढ़ेवाल द्वारा कब्जा कर अवैध कॉलोनाइज़िंग की जा रही थी। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाकर जमीन मुक्त कराने की कार्रवाई की।


लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब इस जमीन पर लंबे समय से कब्जा और प्लॉटिंग हो रही थी, तब राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन आखिर कहां था?


नोटिस देकर भूल गए तहसीलदार?
सूत्रों के अनुसार अवैध कॉलोनाइजर को पहले ही नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई। यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई की जाती, तो सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा इतनी दूर तक नहीं बढ़ता। अब जब मामला उजागर हुआ तो जेसीबी चलाकर कार्रवाई दिखा दी गई।


सरकारी जमीनों की बंदरबांट के आरोप
नैनपुर नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व, नजूल, घास और वन विभाग की जमीनों पर अवैध कब्जे और निर्माण की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ भूमाफिया राजस्व विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों को प्लॉटों में बदलकर बेच रहे हैं।


सबसे गंभीर आरोप तो यह भी है कि श्मशान भूमि तक को प्लॉट बनाकर बेचने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। यदि यह सच है तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल है।


पूर्व पटवारियों के कारनामे, जिम्मेदार कौन?
क्षेत्र में चर्चा है कि पूर्व में पदस्थ रहे कुछ पटवारियों के कार्यकाल के दौरान ही सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और कॉलोनियां बसने का खेल शुरू हुआ। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या उन मामलों की कभी जांच हुई या फाइलें सिर्फ दफ्तरों में दबा दी गईं?


बस स्टैंड निर्माण भी विवादों में
सिविल हॉस्पिटल नैनपुर के सामने प्रस्तावित बस स्टैंड निर्माण कार्य भी अब विवादों के घेरे में आ गया है। बताया जा रहा है कि यह क्षेत्र साइलेंट जोन में आता है, जिसके कारण निर्माण पर रोक लग गई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब यह क्षेत्र साइलेंट जोन था तो निर्माण की अनुमति कैसे मिली और अब तक हुए भुगतान का जिम्मेदार कौन होगा?


वन और नजूल भूमि पर भी कब्जे
नैनपुर क्षेत्र में वन विभाग और नजूल भूमि पर भी कब्जों की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में वन भूमि होने के बावजूद पटवारी और तहसील स्तर से आवंटन तक कर दिया गया, जो गंभीर जांच का विषय है।
थाना परिसर से लगी जमीन भी विवादित
नैनपुर थाने से लगी दीवार तोड़ने और खसरा नंबर 410 की नजूल जमीन पर निर्माण को लेकर भी मामला प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है। शिकायत के बाद एसडीएम से लेकर तहसीलदार और आरआई-पटवारी स्तर तक पत्राचार हुआ, लेकिन अब तक जमीन की वास्तविक स्थिति साफ नहीं हो पाई है।


हाईकोर्ट में मामला, फिर भी पट्टे बांट दिए
नगर की 311 दुकानों का मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के बावजूद राजस्व विभाग द्वारा 48 लोगों को धारणा अधिकार के तहत पट्टा आवंटित कर दिया गया। यह निर्णय भी सवालों के घेरे में है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन था तो पट्टे कैसे जारी कर दिए गए।


बड़ा सवाल — कार्रवाई सिर्फ दिखावा तो नहीं?
नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बीच अब लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ छोटे-मोटे अतिक्रमण तक ही सीमित है और बड़े भूमाफियाओं पर कार्रवाई करने से परहेज किया जा रहा है?


यदि जिला प्रशासन वास्तव में सरकारी जमीनों को बचाना चाहता है, तो जरूरी है कि नैनपुर क्षेत्र में हुई सभी अवैध कॉलोनियों, जमीन आवंटन और राजस्व रिकॉर्ड की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।


वरना यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकारी जमीनों पर कब्जे का खेल बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव ही नहीं है।

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