दैनिक रेवाँचल टाईम्स – सनातन परंपरा में कुछ तिथियां ऐसी होती हैं जो जीवत संदेश देती है ऐसी ही एक परम पावन तिथि है अक्षय तृतीया जिसे आखातीज या अक्ति के नाम से भी जाना जाता है इसमें बिना किसी विशेष गणना के विवाह गृह प्रवेश मुंडन यज्ञोपवीत जैसे कार्य किए जा सकते हैं पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि इस दिन किया गया जप तप दान और पूजन अच्छा फल देने वाला होता है वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व आध्यात्मिक उन्नति धर्म सेवा और सत्कर्म की कभी न समाप्त होने वाली परंपरा का स्मरण कराता है
अक्षय तृतीया का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि कालचक्र परिवर्तन की साक्षी है अक्षय तृतीया के दिन ही सतयुग का समापन हुआ था और त्रेता युग का आरंभ हुआ था भगवान विष्णु के छठे अवतार शास्त्र के ज्ञाता भगवान परशुराम का जन्म भी इसी तिथि को हुआ था भागीरथ की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा इसी दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थी जिससे समस्त जीवों का उद्धार हुआ महाभारत काल में पांडवों के बनवास के दौरान सूर्य देव ने उन्हें अक्षय प्रदान किया था जिससे उन्हें कभी भी अन्न की कमी नहीं हुई इसी तिथि में द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता का नास इसी तिथि में किया था
पूजन विधि
अक्षय तृतीया का पर्व भगवान विष्णु के लक्ष्मी नारायण स्वरूप को समर्पित है साथ ही यह दिन स्वर्ग के खजांची कुबेर देव के लिए भी समर्पित है इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदियों में स्नान करें तत्पश्चात हाथ में जल लेकर व्रत या विशेष पूजा का संकल्प लें पीले पुष्प चंदन धूप दीप अर्पित करें भगवान को सत्तू कक डी चने की दाल और फलों का भोग लगाये ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का यथाशक्ति जप करें
इस दिन पीपल आम बरगद बेल जामुन जैसे फलदार वृक्षों का रोपण करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है शास्त्रों के अनुसार जैसे ये वृक्ष वर्षों तक हरे भरे रहते हैं इस प्रकार इनका पोषण करने वालों का जीवन भी सुख समृद्धि और उन्नति से भर जाता है
मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए यह न केवल स्वास्थ्यवर्धक होता है बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी फलदाई माना गया है तो होगा
अक्षय तृतीया बसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु के प्रारंभ की तिथि भी है इस दिन जल से भरे घडे छाता चटाई चावल घी नमक खीरा आम खरबूजा मिश्री सत्तू आदि वस्तुओं का दान करना अत्यंत पुण्यकारी बताया गया है इससे व्यक्ति के जीवन में दरिद्रता दूर होती है और अक्षय फल की प्राप्ति होती है पंडित संदीप ज्योतिषी के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया बहुत ही शुभ मानी जा रही है
क्योंकि इस सारे दुर्लभ संयोगों का निर्माण होने जा रहा है इस दिन शुक्र वृषभ राशि में प्रवेश करेगा जिससे मालव्य राजयोग बनेगा इसके अलावा इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में प्रवेश करेंगे इस दिन गजकेसरी योग का निर्माण भी हो रहा है इस दिन स्वाती विशाखा नक्षत्र के साथ ब्रह्म योग इंद्र योग के साथ खरीदारी का भी दुर्लभ योग बन रहा है इन शुभ योग में पूजा के साथ स्वर्ण आभूषण बर्तन खरीदने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है
