ग्राम सभा से भागे सरपंच सचिव…? नल जल योजना को बनाया मजाक! ग्रामीणों ने उठाया मुद्दा

UP 30 district Fraud in Har Ghar Jal Yojana report of pure drinking water  given without drinking water हर घर जल योजना में 30 जिलों में बड़ा  फर्जीवाड़ा, बिना पीने के पानी

दैनिक रेवाँचल टाईम्स- मंडला, ग्राम सभा का अस्तित्व संकट में दिखाई दे रहा है जिला मंडला की नैनपुर तहसील अंतर्गत ग्राम परसवाड़ा में लोकतंत्र की नींव हिल रही है! सरपंच और सचिव की जानबूझकर की गई घिनौनी साजिश से जल जीवन मिशन की नल जल योजना तीन साल से ठप पड़ी है,

और अब तो हद हो गई जब ग्राम सभा में ग्रामीणों के तीखे सवालों से डरकर ये दोनों कायरतापूर्ण तरीके से सभा स्थल से फरार हो गए। 31 जनवरी 2026 को आयोजित ग्राम सभा में पानी की किल्लत का मुद्दा गरमाया, लेकिन सरपंच-सचिव ने जवाब देने की बजाय भागने में अपनी शान समझी, जिससे पूरे जिले में प्रशासनिक अराजकता की बू आने लगी है।


ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरपंच और सचिव मिलीभगत से इस महत्वाकांक्षी योजना को दबा रहे हैं, ताकि अपनी जेबें भर सकें या ऊपरी दबाव में झुक सकें। सभा में जब ग्रामीणों ने नल जल योजना की हकीकत जानने की मांग की, तो मौके पर जाकर साफ हो गया कि लगा हुआ मोटर पूरी तरह खराब है और पानी की सप्लाई असंभव बना रहा है। लेकिन सरपंच-सचिव का झूठा बहाना?

“बोर में पानी कम है!” यह सफेद झूठ ग्रामीणों को गुमराह करने की कोशिश है, जबकि योजना के तहत लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं और तीन साल बीतने के बाद भी एक बूंद पानी नहीं टपका।


सभा से लौटकर जब ग्रामीणों ने सच्चाई उजागर की, तो सरपंच और सचिव ने लोकतंत्र का अपमान करते हुए सभा छोड़ दी और गांव के किसी घर में छिपकर दूसरे मुद्दों पर नोटिस बनाने लगे। उप सरपंच ने इस कायराना हरकत पर कड़ी आपत्ति जताई और बताया कि ग्रामीण घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन ये दोनों भाग खड़े हुए।

पूरे मंडला जिले में ग्राम सभाओं का यह हाल है – प्रस्ताव पारित होते हैं, लेकिन अमल शून्य! ग्रामीणों का मोहभंग हो रहा है, और वे अब खुलकर मांग कर रहे हैं: सरपंच-सचिव को तत्काल हटाओ, योजना की तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराओ, दोषियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करो, और ग्राम परसवाड़ा में नल जल योजना को फौरन चालू करो।


शासन-प्रशासन की चुप्पी और भी ज्यादा शर्मनाक है – समाचार पत्रों में लगातार खबरें छप रही हैं, लेकिन कानों में जूं तक नहीं रेंग रही। क्या मंडला जिला प्रशासन सो रहा है? ग्रामीणों की प्यास बुझाने के बजाय, सरकारी योजनाओं को लूट का जरिया बनाने वालों को कब तक बख्शा जाएगा? समय आ गया है कि जिले के आला अधिकारी जागें और इस घोर अन्याय को खत्म करें, वरना लोकतंत्र की सांसें थम जाएंगी!

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