
दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आज कई महत्वपूर्ण याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिनमें न्यायिक सुधारों से जुड़े विषय केंद्र में रहे। अदालत के समक्ष लंबित मामलों के त्वरित निपटारे, न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, तकनीक के अधिक उपयोग और आम नागरिकों की न्याय तक पहुंच आसान बनाने जैसे मुद्दों पर व्यापक बहस हुई।
न्यायिक सुधारों पर फोकस
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि बढ़ती पेंडेंसी न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती है। इस पर अदालत ने केस मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने, ई-फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई जैसे उपायों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
लंबित मामलों और समयबद्ध सुनवाई का मुद्दा
कुछ याचिकाओं में ट्रायल और अपील की समयसीमा तय करने की मांग रखी गई। अदालत ने कहा कि समयबद्ध न्याय लोकतंत्र की बुनियाद है और निचली अदालतों से लेकर शीर्ष अदालत तक समन्वय जरूरी है।
प्रक्रियागत पारदर्शिता और जवाबदेही
याचिकाओं में न्यायिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता बढ़ाने, आदेशों की त्वरित उपलब्धता और केस स्टेटस की रियल-टाइम जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। अदालत ने संकेत दिया कि तकनीकी सुधारों से सिस्टम को अधिक नागरिक–अनुकूल बनाया जा सकता है।
सरकार और बार की भूमिका
सुनवाई में बार काउंसिल और सरकार की भूमिका पर भी विचार हुआ। अदालत ने कहा कि न्यायिक सुधार केवल अदालतों तक सीमित नहीं, बल्कि विधायिका, कार्यपालिका और अधिवक्ताओं—सभी के सहयोग से ही संभव हैं।
आगे की कार्यवाही
कुछ याचिकाओं पर अदालत ने सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है, जबकि कुछ मामलों में विस्तृत सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की गई। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक सुधारों पर ठोस और व्यावहारिक समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
