श्रीनिवास बाबा बर्फानी निवास” कॉलोनी खुलासा ना नगर निगम से परमिशन, न टीएनसीपी से मंजूरी

शासन और जनता की आंखों में धूल झोंककर खड़ी कर दी कॉलोनी

दैनिक रेवांचल टाइम्स, जबलपुर

जबलपुर। शहर में अवैध कॉलोनियों का खेल अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। “श्रीनिवास बाबा बर्फानी निवास” कॉलोनी इसका ताजा उदाहरण है, जहां बिना नगर निगम से अनुमति, बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) की मंजूरी और बिना नक्शा पास कराए धड़ल्ले से प्लॉट और मकान बेचे जा रहे हैं।

जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका

14 से 42 लाख रुपये तक के सपनों के घर का लालच देकर आम लोगों को फंसाया जा रहा है। नतीजा—न घर सुरक्षित, न भविष्य। पीड़ित परिवार अब ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

कानून है स्पष्ट – फिर भी खेल जारी

नगर निगम अधिनियम 1956 की धारा 293 और 307 – बिना अनुमति भवन निर्माण अपराध।टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम 1973 – बिना पंजीकरण कॉलोनी अवैध।
IPC 420 – धोखाधड़ी, संज्ञेय अपराध।सुप्रीम कोर्ट आदेश – अवैध कॉलोनी में खरीदार को कोई कानूनी सुरक्षा नहीं।

इसके बावजूद, कॉलोनाइज़र खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए मकान बेच रहे हैं और जिम्मेदार विभाग “चुप्पी साधे” बैठे हैं।

करोड़ों का राजस्व नुकसान

हर प्लॉट और मकान पर लगने वाला टैक्स व स्टाम्प ड्यूटी सरकार तक नहीं पहुंच रहा। यानी यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं बल्कि बड़ा राजस्व घोटाला है।

प्रशासन और नेताओं पर सवाल

क्या नगर निगम और टीएनसीपी को भनक नहीं?क्या मिलीभगत के बिना संभव है इतनी बड़ी कॉलोनी का खड़ा होना?

शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

कॉलोनाइज़र का तर्क – “छोटे प्लॉट पर कंस्ट्रक्शन”

स्थानीय लोगों ने बताया कि कॉलोनाइज़र का कहना है –

“हम छोटे-छोटे प्लॉट में मकान बना रहे हैं, इसमें विभागीय अनुमति की ज़रूरत नहीं पड़ती।”

लेकिन हकीकत यह है कि यह लोगों को गुमराह कर कानूनी प्रक्रिया से बचने की चाल है।

जनता के लिए चेतावनी

किसी भी कॉलोनी में निवेश से पहले नगर निगम और टीएनसीपी से लिखित जानकारी लें।…
सिर्फ़ विज्ञापन, वादे और गारंटी पर भरोसा न करें..
धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत FIR दर्ज कराएं।..

यह खबर अब यह मैसेज देती है कि प्रशासन की चुप्पी और भूमाफ़िया की चालबाज़ी, दोनों मिलकर जबलपुर की जनता को लूट रहे हैं।

Share This Article
Translate »