रुक्मणी-कृष्ण विवाह की दिव्य झांकी से सुभद्रा नगर हुआ कृष्णमय — भागवत कथा में उमड़ा प्रेम, भक्ति और आनंद

The divine scene of Rukmini-Krishna's wedding filled Subhadra Nagar with Krishna's presence. The Bhagwat Katha overflowed with love, devotion, and joy.

रेवाँचल टाईम्स – मंडला, जिले की ग्राम पंचायत कटरा स्थित सुभद्रा नगर में जारी श्रीमद्भागवत अमृत ज्ञान कथा महोत्सव में शुक्रवार, 14 नवम्बर 2025 का दिन भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक उत्साह से सराबोर रहा। धर्मशास्त्राचार्य पं. मानवेंद्र शास्त्री जी महाराज द्वारा सुनाए गए रुक्मणी विवाह के पावन प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा स्थल पर प्रस्तुत रुक्मणी-कृष्ण विवाह की जीवंत झांकियों ने ऐसा दिव्य वातावरण रचा कि उपस्थित श्रद्धालुओं को मानो वास्तविक सजीव विवाह का साक्षात्कार हो रहा हो। मंगलगीत, शहनाई और भक्ति संगीत की मधुर धुनों से पूरा परिसर कृष्णमय हो उठा।

पं. शास्त्री जी ने रुक्मणी जी के निष्कपट प्रेम और अटूट समर्पण का वर्णन करते हुए कहा कि उनका कृष्ण के प्रति अनुराग भक्ति का सर्वोच्च आदर्श है। उन्होंने बताया कि रुक्मणी जी भक्त और भगवान के मिलन का शाश्वत प्रतीक है। कथा के दौरान जब रुक्मणी हरण का प्रसंग आया और झांकी में श्रीकृष्ण का द्वारका से विदर्भ पहुंचना तथा रुक्मणी को विवाह हेतु साथ ले जाना प्रदर्शित किया गया, तो दर्शक खुशी और उत्साह से झूम उठे। “जय रुक्मिणी-वल्लभ”, “जय श्रीकृष्ण” और “कान्हा जी की जय” के जयघोषों ने वातावरण को और भी दिव्य बना दिया।

The divine scene of Rukmini-Krishna's wedding filled Subhadra Nagar with Krishna's presence. The Bhagwat Katha overflowed with love, devotion, and joy.
The divine scene of Rukmini-Krishna’s wedding filled Subhadra Nagar with Krishna’s presence. The Bhagwat Katha overflowed with love, devotion, and joy.

कथा के अगले चरण में शास्त्री जी ने विवाह संस्कार का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि रुक्मणी विवाह केवल एक राजसी घटना नहीं, बल्कि प्रेम और धर्म का महत्वपूर्ण संदेश है। उन्होंने कहा कि जब संकल्प पवित्र और प्रेम निष्कलंक हो, तब भगवान स्वयं अपने भक्तों का हाथ थाम लेते हैं। विवाह की झांकियों में पारंपरिक वैदिक विधि, सुसज्जित मंडप, अग्नि, पुष्पवर्षा और वधू-वर के दिव्य स्वरूप को देखकर श्रद्धालुओं को ऐसा प्रतीत हुआ मानो वे स्वयं विदर्भ नरेश के महल में संपन्न हो रहे दिव्य विवाह के साक्षी हों।

The divine scene of Rukmini-Krishna's wedding filled Subhadra Nagar with Krishna's presence. The Bhagwat Katha overflowed with love, devotion, and joy.
The divine scene of Rukmini-Krishna’s wedding filled Subhadra Nagar with Krishna’s presence. The Bhagwat Katha overflowed with love, devotion, and joy.

कथा परिसर को विशेष रूप से दुल्हन की तरह सजाया गया था। दीपमालाओं की रोशनी, पुष्प सज्जा और भक्ति संगीत की गूंज के बीच रुक्मणी-कृष्ण का दिव्य मिलन आध्यात्मिक सौन्दर्य की अनुपम छटा बिखेर रहा था। कथा उपरांत आरती और भजन संध्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और श्रीकृष्ण-रुक्मणी के प्रति अपनी भक्ति समर्पित की।

सुभद्रा नगर में आज का दिन प्रेम, भक्ति, सौहार्द और आध्यात्मिक आनंद का अद्भुत उत्सव बन गया। रुक्मणी विवाह की दिव्य प्रस्तुति श्रद्धालुओं के हृदयों में सदा-सदा के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव के रूप में अंकित हो गई।

Share This Article
Translate »