ये मत मानिए कि शहर में हेलमेट को लेकर कोई जागरूकता नहीं है …. हेलमेट है साहब, लेकिन सिर पर नहीं… पेट्रोल के वक़्त शोपीस की तरह इस्तेमाल हो रहा है।
“नो हेलमेट-नो पेट्रोल”….नाम में दम है, नीति भी दमदार है। लेकिन ज़मीनी हालात? दम निकल चुका है!
जबलपुर की सड़कों पर कानून का हाल ऐसा है जैसे शादी में मेहमान …… बस फोटो के लिए।
किराए का हेलमेट: सुरक्षा या सिर्फ़ एंट्री पास?
रानीताल के पेट्रोल पंप पर एक अनोखा जुगाड़ देखा गया। हेलमेट नहीं है? कोई बात नहीं! 10 रुपये दो, हेलमेट लो, पेट्रोल भरवाओ, और हेलमेट वापस कर दो!
यह हेलमेट अब सिर की सुरक्षा नहीं, पेट्रोल पास बन चुका है।
जिनके पास हेलमेट नहीं हैं, वो किराए पर ले रहे हैं। जिनके पास हैं, वो दोस्त से मांग रहे हैं। पेट्रोल के लिए हेलमेट उधार लिया जा रहा है, पहनना सिर पर नहीं …… सिस्टम पर ताना है।
हेलमेट दोस्त का, रिस्क अपना!
रिपोर्टिंग के दौरान एक दिलचस्प सीन दिखा….
युवक बोला: “भाई हेलमेट दे, पेट्रोल डलवाना है।”
दोस्त ने हेलमेट पकड़ा दिया। पेट्रोल भरवाया गया। हेलमेट वापस कर दिया गया।
सीधी बात: हेलमेट की अहमियत नहीं, “हेलमेट की एक्टिंग” चल रही है।
हेलमेट सिर पर नहीं….हैंडल पर है
शहर की सड़कों पर आपको हेलमेट मिल जाएगा….लेकिन सिर पर नहीं।
कोई हाथ में पकड़े है, कोई बाइक के हैंडल पर टांगे है।
जब पेट्रोल चाहिए, तब पहन लिया। पेट्रोल मिल गया….फिर हेलमेट का हक खत्म।
ये सुरक्षा है? या मज़ाक?
बोतलों में पेट्रोल: हादसे को न्यौता
और बात सिर्फ हेलमेट तक ही सीमित नहीं। खमरिया के एक पेट्रोल पंप पर तो बोतलों में खुलेआम पेट्रोल बेचा जा रहा है।
अब ज़रा सोचिए….ये पेट्रोल अगर कहीं गिरा, आग लगी, या किसी ने गलत इस्तेमाल कर लिया तो?
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, हत्या की भूमिका है।
काग़ज़ों में सख्ती, सड़कों पर ढील
प्रशासन ने नियम तो बना दिए, लेकिन निगरानी गायब है।
पेट्रोल पंप पर कोई अधिकारी नहीं, कोई पूछने वाला नहीं।
और आम लोग?
उन्हें लगता है …… हेलमेट चालान से बचने की चीज़ है, ज़िंदगी बचाने की नहीं।
सवाल ये है कि ये मज़ाक कब बंद होगा?
जब तक नियमों को ‘सज़ा’ मानते रहेंगे, वो सुरक्षा नहीं बन सकते।
जब तक हेलमेट सिर्फ़ चालान से बचने की ढाल बना रहेगा,
तब तक मौत सिर पर सवार रहेगी।
हेलमेट का किराया 10 रुपये, लेकिन जान की क़ीमत? सोचिए…
“नो हेलमेट-नो पेट्रोल” जैसी नीतियां तभी असरदार बनेंगी जब आम आदमी उन्हें पुलिस के डर से नहीं, अपने बच्चों के प्यार में अपनाएगा।
वरना नियम भी तमाशा बनते रहेंगे और हेलमेट हाथ में… खतरा सिर पर चलता रहेगा।
रिपोर्ट आरती लोधी
