पवई (पन्ना)।
जल संसाधन विभाग पवई में कार्यरत रही दलित महिला गीता बाल्मीकि बीते एक वर्ष से दर-दर भटक रही है। 9 वर्षों तक विभाग में प्रतिदिन सुबह झाड़ू लगाकर स्वच्छता का कार्य कर अपने बच्चों का भरण-पोषण करने वाली गीता को विभाग की महिला अधिकारी उमा गुप्ता (कार्यपालन यंत्री) ने अभद्रता पूर्वक नौकरी से बाहर कर दिया।
दो बच्चों की परवरिश संकट में
गीता बाल्मीकि के घर की जिम्मेदारी उसके कंधों पर ही है। दो छोटे बच्चों की देखभाल के लिए वह रोजाना संघर्ष कर रही है, लेकिन नौकरी छिन जाने से अब परिवार का भविष्य अधर में लटका है। वह बीते कई महीनों से जल संसाधन विभाग के गेट पर बैठकर न्याय की गुहार लगा रही है।

ठेकेदारों और आंदोलनों की सच्चाई
दलित और आदिवासी ठेकेदारों के नाम पर आए दिन विभिन्न क्षेत्रों में आंदोलन और राजनीति होती रहती है। लेकिन जब वास्तविक पीड़ित महिला सड़क पर संघर्ष कर रही है तो उसके लिए कोई खड़ा नजर नहीं आता। राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन दिखावटी नारेबाजी करते हैं, मगर गीता जैसी महिलाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं।

मीडिया के सामने खुला दर्द
गीता बाल्मीकि की आवाज जब मीडिया तक पहुंची तो उसने अपना दर्द सार्वजनिक किया। उसने सवाल उठाया कि जब वह 9 वर्षों तक विभाग में कार्यरत रही, तो अचानक बिना कारण उसे क्यों निकाल दिया गया? क्या दलित होने की वजह से उसके साथ भेदभाव किया गया?
