पनागर। प्रताप वार्ड स्थित शिव मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा में प्रख्यात कथा व्यास भैया जी पाण्डेय ने भगवान श्री गणेश के जन्म एवं उनके ‘प्रथम पूज्य’ बनने की दिव्य कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान गणेश की लीलाओं का रसपान कर भक्ति भाव में डूब गए।कथा व्यास ने बताया कि माता पार्वती ने स्नान से पूर्व अपने शरीर के चंदन एवं उबटन से एक सुंदर बालक की रचना कर उसमें प्राण स्थापित किए तथा उसे द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया।
इसी दौरान भगवान शिव के आगमन पर बालक ने उन्हें अंदर प्रवेश करने से रोक दिया। इससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने त्रिशूल से उसका शीश अलग कर दिया।माता पार्वती के शोक और क्रोध से संपूर्ण सृष्टि संकट में पड़ गई। तब भगवान शिव के आदेश पर गणों ने उत्तर दिशा से एक हाथी के शिशु का सिर लाकर बालक के धड़ से जोड़ दिया।
इस प्रकार भगवान गणेश को पुनर्जीवन प्राप्त हुआ और वे गजानन कहलाए।कथा के दौरान गणेश एवं कार्तिकेय के मध्य ब्रह्मांड की परिक्रमा प्रतियोगिता का प्रसंग भी सुनाया गया। कथा व्यास ने बताया कि जहाँ कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा करने निकल पड़े, वहीं बुद्धि और विवेक के प्रतीक भगवान गणेश ने अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा कर ली।
उन्होंने माता-पिता को ही समस्त संसार का स्वरूप मानते हुए यह संदेश दिया कि माता-पिता की सेवा और सम्मान ही सबसे बड़ा धर्म है।भगवान गणेश की इस अद्भुत बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें सर्वप्रथम पूजनीय होने का वरदान दिया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति और श्रद्धा के साथ भगवान शिव एवं गणेश जी के जयकारे लगाए। महाशिवपुराण कथा में प्रताप वार्ड सहित नगर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु प्रतिदिन सहभागिता कर रहे हैं।
