करेंट से पीड़ित डेढ़ वर्षीय मासूम को लेकर तीन अस्पताल भटका परिवार, समय पर इलाज न मिलने का आरोप, बच्चे की मौत

Revanchal
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सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल, परिजनों ने की जांच और कार्रवाई की मांग

ड्यूटी डॉक्टर को बुलाने पर अस्पताल नहीं आने के आरोप

दो बहनों में अकेला भाई था परिवार में टूटा दुखों का पहाड़

दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग। जिले में सरकारी अस्पतालों से मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। करेंट लगने से घायल हुए डेढ़ वर्षीय मासूम को बचाने के लिए परिजन एक के बाद एक तीन सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आखिरकार मासूम ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद परिजनों में आक्रोश व्याप्त है।


घटना ग्राम बाहरपुर के भवानी टोला की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार डेढ़ वर्षीय तेजस्वी मसराम सोमवार सुबह घर में खेल रहा था। इसी दौरान वह पास में चल रहे टेबल फैन के खुले तार की चपेट में आ गया और उसे जोरदार करंट लग गया। परिजनों ने तत्काल बच्चे को उठाकर करीब दस मिनट के भीतर उप स्वास्थ्य केंद्र बाहरपुर पहुंचाया।


परिजनों का आरोप है कि उप स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद नर्स ने प्राथमिक उपचार देने के बजाय उन्हें अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिवार बच्चे को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोरखपुर पहुंचा, लेकिन वहां भी सुबह करीब साढ़े आठ बजे तक कोई जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं मिला। बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती देख परिजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बजाग लेकर पहुंचे।


परिजनों का कहना है कि उस समय तक बच्चे की सांसें चल रही थीं और उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता थी। अस्पताल में मौजूद नर्स ने ड्यूटी डॉक्टर को फोन किया, लेकिन कथित तौर पर डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचे। इसी दौरान बच्चे की हालत और गंभीर हो गई तथा कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई।

मृतक बालक के चाचा ब्रम्हदत्त मसराम ने बताया कि बजाग अस्पताल पहुंचने के बाद नर्स द्वारा फोन किए जाने के बावजूद ड्यूटी डॉक्टर बच्चे को देखने नहीं आए। उन्होंने कहा, “मैं स्वयं दो बार डॉक्टर के रूम तक गया, दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। हम लगातार डॉक्टर का इंतजार करते रहे और इसी दौरान बच्चे की मौत हो गई।”

मृतक बालक के पिता सोमदत्त मसराम ने कहा, “करेंट लगने के बाद हम बिना देर किए बच्चे को लेकर एक के बाद एक तीन अस्पताल पहुंचे, लेकिन कहीं भी समय पर इलाज नहीं मिला। यदि समय पर उपचार मिलता तो शायद हमारे बच्चे की जान बच सकती थी। लापरवाह स्वास्थ्य महकमे पर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि जो हमारे साथ हुआ है उसकी पुनरावृत्ति किसी अन्य परिवार के साथ न हो।”


डॉक्टर पर पहले भी लग चुके हैं आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बजाग में पदस्थ डॉ. विपिन राजपूत पर पूर्व में भी लापरवाही के आरोप लग चुके हैं। इन मामलों की जांच भी हुई थी, लेकिन अब तक उन्हें हटाए जाने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की गई। ताजा घटना के बाद एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

इस मामले में
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बजाग के सीबीएमओ चंद्रशेखर धुर्वे ने बताया, “ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक को अस्पताल आना चाहिए था, इसकी जांच की जा रही है। वहीं प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार जब बच्चे को अस्पताल लाया गया था, तब उसकी मृत्यु हो चुकी थी और इसकी जानकारी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक को दे दी गई थी। परिजनों द्वारा लगाए गए डॉक्टर के नहीं आने संबंधी आरोपों की भी जांच कराई जाएगी। यदि कहीं कोई कमी पाई जाती है तो भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।”


निष्पक्ष जांच की मांग
मासूम की मौत के बाद परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। वहीं यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारी किसकी तय होती है और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है

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