आदिवासी अंचल की वर्षों पुरानी मांग को मिलेगी आवाज: विधानसभा में गूंजेगा ‘नर्मदा-मैकलसुता-भोरमदेव रेल कॉरिडोर’ का मुद्दा

Revanchal
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​विधायक बिछिया ने पेश किया अशासकीय संकल्प; रेल एक्टिविस्ट की तकनीकी रिपोर्ट बनी मुख्य आधार

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला, जिले के क्षेत्र क्रमांक 105 के कांग्रेसी बिछिया विधायक आगामी विधानसभा सत्र में क्षेत्रीय विकास एवं रेल कनेक्टिविटी से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा उठाने जा रहे हैं। उन्होंने विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के नियम 117 के तहत एक अशासकीय संकल्प की सूचना दी है, जिसमें ‘नर्मदा-मैकलसुता-भोरमदेव रेल कॉरिडोर’ (बिलासपुर–पंडरिया–बिछिया–मंडला–जबलपुर) को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित कर प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत करने की पुरजोर मांग की गई है।


विशेष बात यह है कि विधायक के द्वारा प्रस्तुत इस संकल्प में रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी द्वारा तैयार की गई विस्तृत तकनीकी एवं व्यावहारिक रिपोर्ट के आंकड़ों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है, जो इस परियोजना की आर्थिक और सामाजिक उपयोगिता को मजबूती से सिद्ध करती है।


विधानसभा में उठेंगे ये मुख्य बिंदु एवं तर्क:
1.230 किमी मिसिंग लिंक का निर्माण: बिलासपुर-पंडरिया-बिछिया-मंडला-गवारीघाट (230 किमी) के मध्य प्रस्तावित मिसिंग लिंक के निर्माण हेतु केंद्र सरकार को राज्य सरकार की ओर से तत्काल अनुशंसा भेजने की मांग।
2.100 से 110 किमी घटेगी दूरी: इस रेल मार्ग के बनने से जबलपुर और बिलासपुर के बीच की दूरी लगभग 100-110 किमी कम हो जाएगी, जिससे यात्रियों का समय और किराया दोनों बचेगा।
3.आर्थिक रूप से लाभदायक (12-14% ROR):
दक्षिण-पूर्व मध्य-रेलवे के जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार परियोजना का रेट-ऑफ-रिटर्न (ROR) 12 से 14 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो इसे आर्थिक रूप से पूरी तरह व्यावहारिक (Viable) बनाता है।
4.आदिवासी अंचल का सर्वांगीण विकास:
महाकौशल, मैकल अंचल और छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में कृषि, वनोपज, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार को भारी बढ़ावा मिलेगा।
5.अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सर्किट:
यह कॉरिडोर कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, भोरमदेव, महामाया शक्तिपीठ और भेड़ाघाट को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ेगा। साथ ही वीरांगना रानी दुर्गावती, राजा शंकरशाह-रघुनाथ शाह एवं रानी अवंती बाई लोधी की ऐतिहासिक विरासत का भी सम्मान होगा।

वर्ष 2004 के बाद नए सर्वे की जरूरत:

वही बिछिया विधायक ने अपने संकल्प में स्पष्ट किया है कि वर्ष 2004 के बाद से इस लाइन का कोई आधिकारिक पुनरीक्षण या सर्वेक्षण नहीं हुआ है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप तुरंत नया ट्रैफिक एवं व्यावहारिकता सर्वेक्षण कराया जाना
अत्यंत आवश्यक है।

वही रेल एक्टिविस्ट नितिन सोलंकी का मानना है कि वर्ष 2004 के बाद से इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर का कोई आधिकारिक पुनरीक्षण या सर्वेक्षण नहीं हुआ है। वर्तमान समय की आवश्यकताओं, बढ़ते यातायात और आर्थिक लाभ (12-14% ) प्रतिफल की दर को देखते हुए केंद्र व राज्य सरकार को तत्काल नया ट्रैफिक एवं व्यावहारिकता सर्वेक्षण कराना चाहिए, ताकि महाकौशल और छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों को जल्द से जल्द राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ा जा सके।

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