कान्हा प्रबंधन और पत्रकारों के बीच बनी सहमति, नौ दिन से चल रहे धरने पर लगा विराम

Revanchal
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14 सूत्रीय मांगों पर सौंपा ज्ञापन, कई मुद्दों पर बनी सहमति के बाद समाप्त हुआ आंदोलन


दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला।
Kanha Tiger Reserve को लेकर पिछले नौ दिनों से जारी पत्रकारों का धरना प्रदर्शन बुधवार को समाप्त हो गया। पत्रकारों और कान्हा प्रबंधन के बीच लगभग दो घंटे तक चली विस्तृत चर्चा के बाद 14 सूत्रीय मांगों में से कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई।
पत्रकार कलेक्ट्रेट मार्ग में लगातार धरना दे रहे थे। बुधवार को कान्हा टाइगर रिजर्व कार्यालय में आयोजित बैठक में पत्रकारों ने एक-एक कर अपनी मांगों और सवालों को प्रबंधन के सामने रखा। बैठक में फील्ड डायरेक्टर रविन्द्र मणि त्रिपाठी, डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा एवं सहायक संचालक आशीष पांडे मुख्य रूप से मौजूद रहे।


काफी देर तक चली चर्चा के दौरान पत्रकारों ने बाघों की मौत, वन्यजीव सुरक्षा, प्रबंधन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए, जिन पर अधिकारियों ने जवाब दिए और समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद पत्रकार सहमत हुए और प्रबंधन को 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।


पत्रकारों की प्रमुख मांगें
धरना दे रहे पत्रकारों ने मांग की कि पत्रकारों के पांच सदस्यीय दल को प्रत्येक माह एक बार कान्हा पार्क की मॉनिटरिंग कराई जाए ताकि मीडिया स्वयं जमीनी स्थिति देख सके और जनता तक सही जानकारी पहुंचा सके। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि कई बार मीडिया को अधूरी या भ्रामक जानकारी दी जाती है।


एक अन्य प्रमुख मांग यह रही कि यदि किसी अधिकारी द्वारा गलत जानकारी दी जाती है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
पत्रकारों ने कान्हा पार्क के अंदर किए जा रहे पक्के निर्माण कार्यों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि होटल, रिसॉर्ट और अन्य स्थायी निर्माण पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं। मांग की गई कि ऐसे सभी निर्माण कार्यों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।


अतिक्रमण और रिसॉर्ट संस्कृति पर उठे सवाल
पत्रकारों ने कान्हा के तीनों प्रमुख गेटों के आसपास बढ़ते अतिक्रमण और व्यावसायिक गतिविधियों को भी गंभीर चिंता का विषय बताया। उनका कहना था कि इससे वन क्षेत्र प्रभावित हो रहा है और वन्यजीवों का प्राकृतिक वातावरण बिगड़ रहा है।


इसके अलावा रिसॉर्ट्स में देर रात तक डीजे, आतिशबाजी और शादी समारोह आयोजित किए जाने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। पत्रकारों का कहना था कि तेज आवाज और रोशनी से वन्यजीवों का प्राकृतिक व्यवहार प्रभावित होता है, इसलिए पार्क क्षेत्र में ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।


आंदोलनकारियों ने कान्हा क्षेत्र को मांसाहार मुक्त घोषित करने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि इससे पर्यावरण संतुलन और जंगल की स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी।


पूरे स्टाफ को बदलने की मांग
पत्रकारों ने कान्हा प्रबंधन के पूरे स्टाफ को बदलने की मांग भी उठाई। उनका आरोप था कि वर्तमान व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है और कई मामलों में जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से बचते नजर आते हैं। उनका कहना था कि नए अधिकारियों की नियुक्ति से प्रबंधन व्यवस्था में सुधार संभव हो सकेगा।
इसके साथ ही पिछले पांच वर्षों के बजट, खर्च, वन्यजीव सुरक्षा, तकनीकी उपकरणों, भोजन, चिकित्सा व्यवस्था और प्रचार-प्रसार पर खर्च की गई राशि का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग भी की गई।


सफारी व्यवस्था और सूचना सार्वजनिक करने की मांग
पत्रकारों ने जंगल सफारी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की मांग करते हुए कहा कि प्रतिदिन कितनी जिप्सियां सफारी में जाती हैं और पार्क के भीतर कौन-कौन से विकास कार्य कराए जा रहे हैं, इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
उन्होंने पार्क के प्रमुख गेटों पर सूचना बोर्ड लगाने की मांग भी रखी, जिसमें सड़क, पुल-पुलिया, जल व्यवस्था और अन्य निर्माण कार्यों की जानकारी दर्ज हो।

प्लास्टिक और बाहरी पशुओं पर भी उठे सवाल
धरना प्रदर्शन के दौरान यह मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया कि पार्क क्षेत्र में मौजूद कुछ बाहरी और पालतू पशु वन्यजीवों के लिए संक्रमण का खतरा बन सकते हैं। पत्रकारों ने ऐसे पशुओं की निगरानी और प्रतिबंध की मांग की।
इसके साथ ही पार्क क्षेत्र में प्लास्टिक डिस्पोजल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग भी उठाई गई। पत्रकारों का कहना था कि प्लास्टिक कचरा वन्यजीवों और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
धरना समाप्त होने के बाद आंदोलन स्थल पर पत्रकारों के बीच हर्ष का माहौल दिखाई दिया। आंदोलनकारियों ने इसे संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से निकला सकारात्मक समाधान बताया और उम्मीद जताई कि आने वाले समय में कान्हा प्रबंधन पारदर्शिता और वन्यजीव सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाएगा।

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