दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला। सरकारी योजनाओं के दम पर गरीबों को छत देने का दावा करने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना अब मंडला जिले में लापरवाही और अव्यवस्था की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। हालात इतने खराब हैं कि हितग्राही महीनों से अपनी ही मेहनत की कमाई और सरकारी किस्त के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
“किस्त नहीं, बस आश्वासन”
ग्रामीणों का आरोप है कि आवास निर्माण के लिए मिलने वाली किस्त समय पर नहीं दी जा रही। कई हितग्राहियों ने बताया कि आधा-अधूरा पैसा देकर काम पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे वे कर्ज लेकर मकान बनाने को मजबूर हो रहे हैं।
मजदूरों का पसीना भी ‘हजम’!
मामला यहीं नहीं रुकता—जी राम जी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनिय) के तहत मिलने वाली मजदूरी तक अटकी हुई है। आरोप है कि आवास निर्माण में लगे मजदूरों का भुगतान महीनों से लंबित है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है।
नैनपुर जनपद बना लापरवाही का केंद्र
सबसे ज्यादा शिकायतें जनपद पंचायत नैनपुर की ग्राम पंचायतों से सामने आ रही हैं, जहां न तो समय पर भुगतान हो रहा है और न ही योजनाओं की सही मॉनिटरिंग। जिओ-टैगिंग जैसी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद भी हितग्राहियों को पूरी राशि नहीं मिल रही—जो सीधे-सीधे नियमों की अनदेखी है।
गरीबों का फूटा गुस्सा
पीड़ितों का कहना है कि “सरकार घर देने की बात करती है, लेकिन अधिकारी पैसा देने में आनाकानी कर रहे हैं।” हालात ऐसे हैं कि कई परिवार अधूरे मकानों में रहने को मजबूर हैं या फिर कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी या फिर गरीबों का हक यूं ही फाइलों में दबा रहेगा?
