4-5 माह का लंबित वेतन, 10-11 माह से रुकी वेतन वृद्धि और मानसिक दबाव को बताया मौत की बड़ी वजह
दैनिक रेवांचल टाइम्स सिवनी– सेवा सहकारी समिति भोमा में विक्रेता के पद पर कार्यरत स्वर्गीय प्रांजुल हरिनखेड़े की असामयिक मृत्यु के बाद उनकी पत्नी अन्वेशा हरिनखेड़े ने जिला कलेक्टर को विस्तृत आवेदन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा प्रथम दृष्टया उत्तरदायी प्रतीत होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
लंबे समय से वेतन और वेतन वृद्धि लंबित रहने का आरोप
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि स्वर्गीय प्रांजुल हरिनखेड़े विगत लगभग 4 से 5 माह से नियमित वेतन भुगतान नहीं मिलने और लगभग 10 से 11 माह से देय वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिलने से लगातार परेशान थे। परिवार का दावा है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष मौखिक और लिखित रूप से अपनी समस्या रखी, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
आर्थिक संकट और स्वास्थ्य समस्याओं से बढ़ा मानसिक तनाव
परिजनों के अनुसार स्वर्गीय हरिनखेड़े पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी जूझ रहे थे। उपचार, पारिवारिक जिम्मेदारियों और लंबित वेतन के कारण वे लगातार आर्थिक और मानसिक दबाव में रहने लगे थे। परिवार के सदस्यों से भी उन्होंने कई बार अपनी परेशानियां साझा की थीं।
कार्यस्थल के माहौल पर भी उठे सवाल
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि समिति के प्रशासक दिलीप डेहरिया, कंप्यूटर ऑपरेटर अजय टेमरे एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी जितेंद्र हनवत के व्यवहार और कार्यशैली के कारण वे स्वयं को मानसिक रूप से प्रताड़ित एवं दबावग्रस्त महसूस करते थे। हालांकि आवेदन में यह भी कहा गया है कि इन आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष जांच का विषय है, इसलिए संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की गहन जांच आवश्यक है।
मृत्यु से पहले परिवार को बताई थी अपनी परेशानी
परिवार के मुताबिक मृत्यु के एक दिन पहले रात्रि लगभग 9:30 से 10 बजे के बीच हुई बातचीत में भी उन्होंने स्वयं को अत्यधिक परेशान और मानसिक रूप से व्यथित बताया था। उन्होंने कार्यस्थल पर प्रतिकूल परिस्थितियां निर्मित होने की बात भी कही थी।
जांच के दायरे में लाने की मांग
आवेदन में मांग की गई है कि मृत्यु से पहले की समस्त परिस्थितियों, लंबित वेतन भुगतान, वेतन वृद्धि में हुई देरी, कार्यस्थल के वातावरण और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।
परिवार ने न्याय और आर्थिक सहायता की भी मांग की
मृतक की पत्नी अन्वेशा हरिनखेड़े ने जिला प्रशासन से मांग की है कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, मानसिक प्रताड़ना, कर्तव्यहीनता अथवा अन्य प्रकार की जिम्मेदारी स्थापित होती है तो उनके विरुद्ध तत्काल कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए शासन स्तर से सहायता भी प्रदान की जाए।
