ग्रामीण यांत्रिकीय विभाग और ठेकेदारों की अमृत सरोवर योजनाओं में कि खुली लूट

Revanchal
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लाखो करोड़ों के सरोवर तरस एक एक बूंद पानी के लिए 47 लाख रुपए के तालाब में 47 बूंद पानी नहीं

“अमृत सरोवर बने भ्रष्टाचार की भेंट, बूंद बूंद पानी को तरसता ‘जल जीवन मिशन’

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिले में सरकारी योजनाओं में कैसे भ्रष्टाचार घोटाले ग़बन किये जाते है वह कोई मंडला जिले के जनप्रतिनिधियों और विभागों के अधिकारी कर्मचारी से आसानी से सीखा जा सकता है जहाँ बेख़ौफ़ होकर सरकारी योजनाओं में ठेकेदारों के साथ साठ गांठ कर सरकारी धन को लूट रहे है।


मंडला जिले के विकास खण्ड मंडला, घुघरी, मवई, मोहगांव, भुआ बिछिया, नारायणगंज, निवास और बीजाडांडी इन नो विकास खण्डो लाखों लाखों रुपये से सरकारी की सरकारी योजनाओं से बनाये गए पानी संरक्षण के लिये अमृत सरोवर योजना से लगभग आधा सैकड़ा से अधिक मात्रा में बनाये गए सरोवर में एक बूंद भी पानी देखने को नही रहा है यू कहे कि सरकार की पानी वाली योजना में ग्रामीण यांत्रिकीय विभाग और ठेकेदार ने पानी ही फेर दिया है और केवल मिट्टी के ढांचे खड़े कर सरकारी पैसा में लूट मंचा दी जिले में बने एक ऐसा अमृत सरोवर नही है जिसमे एक बूंद पानी रुका हुआ है या वर्तमान में देखने को मिल जाये सूखे पड़े है ।


बिना पानी वाले सरोवरों के जिमेदार कौन और कौन करेगा न्याय केंद्र सरकार के द्वारा एक योजना लाई गई थी जिसका नाम था अमृत सरोवर जिसमें लगभग सभी जिलों में लाखों करोड़ों रुपए खर्च करके अमृत सरोवर का निर्माण कार्य किया गया था। सरकार की मंशा थी की गांवों में सरोवर का निर्माण कार्य करवा कर आमजन से लेकर पशु पक्षी की प्यास बुझाने के लिए पानी की जरूरत पूरी की जा सकें। इसी तारतम्य में मंडला जिले में भी करोड़ों रुपए की लागत से अमृत सरोवर बनवाए गए थे।

लेकिन वर्तमान समय में देखने को आ रहा हे कि जिले के विभिन्न गांवों में बनाए गए अमृत सरोवर आज खुद पानी की एक- एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। सरकार की मंशा थी कि ये सरोवर ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण का मजबूत आधार बनेंगे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये सरोवर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए।

*गर्मी का मौसम अभी अपने चरम पर है
लेकिन इन सरोवरों में पानी नदारद है। आसपास के लोग, मवेशी और पक्षी – सभी प्यासे हैं। जिन सरोवरों का नाम “अमृत सरोवर” रखा गया उनमें वर्तमान समय पर न पानी की एक बूंद हे और न ही अमृत अब सवाल पैदा यह होता है कि जिन तालाबों का निर्माण लाखों करोड़ों रुपए का बंदर बाट लगा कर इन सरोवर का निर्माण करवा कर नाम अमृत सरोवर रखा गया, वहां पर अब मौत की सूखी तस्वीर’ देखने को मिलती हैं।

बरसात में जो सरोवर बह गए, उनमें पानी ठहराने की मूलभूत व्यवस्था ही नहीं की गई थी। सवाल ये उठता है कि अगर ये सरोवर अब पानी नहीं रोक पा रहे, तो *करोड़ों खर्च किस पर हुए? क्या यह पूरी योजना केवल कागजों में ही “अमृत” थी?

यह हाल तब है जब पानी को लेकर सरकार की अनेक योजनाएं प्रचारित की जा रही हैं। सरकार के द्वारा जल संरक्षण के लिए छोटे- छोटे कुओं बाबड़ियों की साफ सफाई करवा कर जल संवर्धन करने का कार्य कर रही हैं तो वहीं नाक के नीचे असल में ज़मीनी स्तर पर योजनाएं भ्रष्टाचारियों की भेट चढ़ रही हैं।

जरूरत है कि इस पर…
जांच हो, जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो
और अमृत सरोवर सच में अमृत देने वाला बनें – वरना आने वाली पीढ़ियों के लिए सिर्फ सूखा और सवाल बाकी रह जाएंगे।

पूर्वजों के बनाएं तालाबों बावड़ियों में जल आज भी हैं परन्तु करोड़ों रूपये की लागत से बनाए गए अमृत सरोवर सूखे पड़े हैं…!

हम अपने आसपास और गांवों में अक्सर देखते रहते हैं कि जिस गांव में नदियां नहीं थी उस गांव में तालाबों का निर्माण आज से बहुत सालों पहले हमारे ओर आपके पूर्वजों द्वारा अल्प लागत में तालाबों का निर्माण कार्य करवा कर गांव वालों को दान में दे दिया गया। या निजी उपयोग के साथ साथ सार्वजनिक उपयोग के लिए भी तालाबों का उपयोग में लिया जाता हे।जिससे कि गांव वालों की और पशु पक्षीओ की जलापूर्ति बनी रहें। सीमित साधनों से ओर कम लागत लगा कर जिन तालाबों का निर्माण कार्य वर्षों पहले करवाया गया था उनमें आज भी जल बना हुआ हैं और साल भर उन तालाबों से जलापूर्ति आज भी गांव वालों की और पशु पक्षीओ की जरूरतें पूरी हो रहीं हैं। परन्तु सवाल यह बनता है कि आज वर्तमान समय में करोड़ों रुपए की लागत से निर्माण किए गए तालाबों में सूखा रूपी मौत का सन्नाटा क्यों पसरा हुआ हैं..?

47 लाख 43 हजार रुपए से बनें सरोवर में पानी की एक बूंद नहीं

जिले से 12 किलोमीटर की दूरी पर लफरा ग्राम पंचायत में विगत वर्षों में 47 लाख 43 हजार रुपए के सरकारी धन से अमृत सरोवर का निर्माण कार्य करवाया गया था, जब हमारी रेवांचल टाइम्स की टीम तालाब की स्थिति जानने के लिए ओर पानी की तलाश में निकली तो देखने में आया कि लगभग आधा करोड़ रुपए की लागत से निर्माण करवाए गए अमृत सरोवर में पानी की एक भी बूंद नहीं थी। तो क्या फिर सरकारी अफसरों ने ओर ठेकेदारों ने सरोवर परियोजना में जम कर लूट खसोट की ओर जम कर भ्रष्टाचार किया..??

यह तो सिर्फ एक बानगी हैं जिले में ऐसे बहुत से सरोवर हैं जिनमें न अमृत हैं और न ही अमृत रूपी जल

यह तो सिर्फ एक बानगी हैं यदि पूरे जिले में सही तरीके से अमृत सरोवरों की जांच की जाए तो अमृत सरोवर निर्माण कार्य से करोड़ों रुपए के घोटाले को अंजाम दिया गया हैं। जिले में बनाए गए अमृत सरोवर आज बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। जिले में बैठे नेता सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक इस जिले की सुध लेने वाला कोई नहीं और न ही कोई माई बाप क्योंकि सरकारी अफसर नेताओं के चहेते ठेकदारों ने पूरे जिले में लूट खसोट दिल से मचा रखी है, ओर आमजनता के हित को नज़र अंदाज कर अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं।।

आमजन के लिए बनाए जा रहे अमृत सरोवर हो रहे हैं फैल

जिले में करोड़ों रुपए खर्च कर आमजन के फायदे को लेकर बनाए गए अमृत सरोवर फैल होते हुए दिख रहे हैं क्योंकि करोड़ों रुपए खर्च करके जिन तालाबों में बूंद भर भी पानी न हो ऐसी योजना किस काम की अब सवाल यह उठता है कि क्या ये अमृत सरोवर योजना सरकारी अफसरों ओर रसूखदार ठेकेदारों के फ़ायदे के लिए बनाई गई थी।

हमरा सवाल…क्या सरकार ओर सरकारी अफसर सच में जनहित से जुड़े कार्यों को ज़मीनी हकीकत पर अमली जामा पहनाना चाहते हे। या सिर्फ फोटों शूट ओर समाचार पत्रों के माध्यम से वाह वाही की लूट लेकर बाद में कुंभकर्णीय नींद में जाकर बेसुध होकर सोना जानते हैं।

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