रंगोली सजाकर हुआ स्वागत, श्रद्धालुओं ने उतारी आरती; भक्ति और उल्लास से गूंजा पवई नगर
संवाददाता | पवई
पवई नगर में तीन दिनों तक श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास का केंद्र बना भगवान जगन्नाथ स्वामी का भव्य रथयात्रा महोत्सव शनिवार सायंकाल विधिवत समापन के साथ संपन्न हो गया। भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा एवं बड़े भाई बलभद्र (बलदाऊ) की बारात वैवाहिक रस्में पूर्ण होने के बाद पुनः जगदीश स्वामी मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने रंगोलियां सजाकर, पुष्पवर्षा कर एवं आरती उतारकर भगवान का भव्य स्वागत किया।
उल्लेखनीय है कि 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ स्वामी, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर भव्य बारात के साथ मंदिर से निकले थे। ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और “जय जगन्नाथ” के गगनभेदी जयघोष के बीच निकली रथयात्रा का नगर के विभिन्न मोहल्लों में श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण स्वागत किया। प्रथम रात्रि विश्राम नन्ही पवई में हुआ।
17 जुलाई को शाम छह बजे बारात पुनः आगे बढ़ी और विभिन्न स्थानों पर स्वागत-सत्कार के बीच जनकपुर स्वरूप बागरन टोला पहुंची। यहां रात्रि में भजन-कीर्तन, संकीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भगवान के वैवाहिक उत्सव की पारंपरिक रस्में संपन्न कराई गईं।
शनिवार 18 जुलाई को विवाह उपरांत भगवान की बारात मिलौनीगंज एवं बस स्टैंड मार्ग से होते हुए पुनः जगदीश स्वामी मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने अपने घरों के बाहर आकर्षक रंगोलियां सजाईं, आरती उतारी और भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। नगर “जय जगन्नाथ” के जयघोष से गुंजायमान रहा और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
मंदिर परिसर पहुंचने पर पुजारी अनूप अंशुल पाठक ने भगवान की अंतिम महाआरती संपन्न कराई। महाआरती के उपरांत भगवान का पुनः मंदिर में विधिवत प्रवेश कराया गया। समापन अवसर पर बारात में शामिल श्रद्धालुओं, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सभी धर्मावलंबियों को प्रसाद वितरित किया गया।
तीन दिवसीय रथयात्रा महोत्सव को सफल बनाने में सामाजिक संगठनों, स्थानीय प्रशासन, पुलिस प्रशासन, मंदिर समिति तथा पवई नगर के बुजुर्गों, युवाओं और सभी वर्गों के नागरिकों का उल्लेखनीय योगदान रहा। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, अनुशासन, सामाजिक समरसता और धार्मिक सौहार्द का प्रेरणादायी वातावरण देखने को मिला।
