मूल पदस्थापना स्कूल में, ड्यूटी कार्यालय में! आखिर किसके संरक्षण में चल रही व्यवस्था?
रेवांचल टाइम्स, मंडला।
जनजातीय कार्य विभाग और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एकीकृत माध्यमिक विद्यालय नैझर में सामाजिक विज्ञान शिक्षक के रूप में मूल पदस्थ तुलाराम धुर्वे लंबे समय से खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय घुघरी में मंडल संयोजक के रूप में कार्यरत हैं। हैरानी की बात यह है कि अब तक विभाग की ओर से उनके संलग्नीकरण अथवा पदस्थापना का कोई सार्वजनिक और स्पष्ट लिखित आदेश सामने नहीं आया है।
यदि तुलाराम धुर्वे की मूल पदस्थापना विद्यालय में है तो फिर वे बीईओ कार्यालय में किस अधिकार और किस आदेश के आधार पर कार्य कर रहे हैं? यह सवाल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। ग्रामीणों और शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि आदिवासी अंचल के स्कूल पहले ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, ऐसे में एक शिक्षक का वर्षों तक कार्यालय में बैठना शिक्षा व्यवस्था पर सीधा प्रहार है।
सहायक आयुक्त और बीईओ की चुप्पी पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई वैध आदेश मौजूद है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? और यदि आदेश नहीं है तो फिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
विभागीय सूत्रों का कहना है कि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति और लिखित आदेश के किसी शिक्षक का कार्यालय में लंबे समय तक कार्य करना नियमों के विपरीत माना जा सकता है। ऐसे में सहायक आयुक्त मंडला और खण्ड शिक्षा अधिकारी घुघरी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
विद्यार्थियों का नुकसान, अधिकारियों का संरक्षण?
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर कुछ शिक्षकों को कार्यालयों में संलग्न रखकर व्यवस्था चलाई जा रही है। यदि एक शिक्षक विद्यालय छोड़कर कार्यालय में बैठा है तो उसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है।
शिक्षा के अधिकार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की बात करने वाला विभाग आखिर इस मामले में मौन क्यों है? क्या विद्यार्थियों के भविष्य से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ विशेष लोगों को कार्यालय में बनाए रखना है?
जवाब दें अधिकारी
अब सहायक आयुक्त मंडला और बीईओ घुघरी को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए—
तुलाराम धुर्वे के मंडल संयोजक के रूप में कार्य करने का लिखित आदेश कब जारी हुआ किसने किया और कब तक के लिए?
आदेश किस अधिकारी ने जारी किया?
यदि आदेश नहीं है तो वे अब तक कार्यालय में कैसे कार्यरत हैं?
क्या उनके मूल विद्यालय में शिक्षक की आवश्यकता नहीं है?
क्या इस पूरे मामले में नियमों का पालन किया गया है?
यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
जांच की मांग तेज
वही क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन, कलेक्टर और विभागीय उच्च अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। यदि बिना आदेश के किसी शिक्षक को कार्यालय में बैठाया गया है तो उसे तत्काल मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तभी संभव है जब विभाग यह बताए कि तुलाराम धुर्वे मंडल संयोजक के पद पर नियमों के तहत कार्य कर रहे हैं या फिर किसी विशेष मेहरबानी के कारण आज तक कार्यालय में जमे हुए हैं।
