दैनिक रेवांचल टाईम्स – डर्निलनर्मदा घाटी में प्रस्तावित बसनिया (ओढारी) बांध से मंडला और डिंडोरी के 31 गांव के कुल 2737 परिवार विस्थापित एवं प्रभावित होने वाले हैं।इस बांध के कारण 6343 हेक्टेयर भूमि डूब में आएगी। जिसमें 2443 हेक्टेयर निजी भूमि, 1793 हेक्टेयर शासकीय भूमि और 2107 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। इस बांध से 8780 हेक्टेयर सिंचाई एवं 100 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन निर्धारित किया गया है। परन्तु नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव में बताया गया है कि 100 मेगावाट क्षमता के बावजूद अनुमानित वार्षिक उत्पादन केवल 35 करोड़ यूनिट ही होगी। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की नदी घाटी विशेषज्ञ समिति ने बहुत सारे बिन्दुओं का अध्ययन करने का लिखित निर्देश 21 नवंबर 2023 को दिया था।
अध्ययनों में परियोजना निर्माण के कारण नर्मदा नदी एवं संबंधित नालों के जलग्रहण क्षेत्र की वहन क्षमता, जल प्रवाह की निरंतरता तथा संचयी पर्यावरणीय प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जाना, परियोजना में वन भूमि के उपयोग को यथासंभव कम रखते हुए पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय निरंतरता सुनिश्चित की जाना, परियोजना प्रस्ताव के साथ पर्यावरणीय प्रभाव आकलन एवं पर्यावरण प्रबंधन योजना नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी को भेजकर उनकी टिप्पणियां एवं अनुशंसाएं प्राप्त करना, वन भूमि परिवर्तन एवं जैव विविधता की हानि से जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का पर्यावरणीय लाभ-हानि विश्लेषण करना, टीओआर (ट्रम ऑफ रेफरेंस) के अनुरूप बेसलाइन डाटा संकलित करना एवं जलाशय एवं वन क्षेत्र से लगे कम से कम 10 गांवों में मिट्टी की गुणवत्ता एवं विशेषताओं का अध्ययन करना, परियोजना क्षेत्र के कम से कम 10 स्थानों पर तीनों ऋतुओं (ग्रीष्म, वर्षा एवं शीत) में भूजल स्तर का मापन किया जाना, परियोजना एवं जलविद्युत उत्पादन के कारण जलीय तथा स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र, जल गुणवत्ता, मत्स्य उत्पादन एवं जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कर पर्यावरण प्रबंधन योजना तैयार करना, डूब क्षेत्र एवं बांध के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में स्थित रेत खनन एवं अन्य खदान स्थलों का सर्वेक्षण एवं चिन्हांकन करना, निर्माण सामग्री का स्रोत एवं परिवहन योजना
निर्माण सामग्री के स्रोत, परियोजना स्थल से उनकी दूरी तथा परिवहन की विस्तृत योजना रिपोर्ट में सम्मिलित करना, निर्माण कार्य हेतु उपयोग में लाई जाने वाली खदानों के सुधार, पुनर्स्थापन एवं मरम्मत की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करना,अनुसूची-1 के अंतर्गत संरक्षित वन्यजीवों के संरक्षण हेतु विस्तृत योजना तैयार कर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन) से अनुमोदन प्राप्त करना,
जलाशय एवं नदी किनारों की सुरक्षा तथा कटाव रोकने हेतु विस्तृत योजना तैयार कर रिपोर्ट में सम्मिलित करना, परियोजना क्षेत्र की 10 किलोमीटर परिधि में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के परामर्श से वाटरशेड विकास की संभावनाओं का अध्ययन कर विस्तृत योजना तैयार करना, परियोजना में उपयोग होने वाले जल के संबंध में सक्षम अधिकारियों से स्वीकृति, हस्ताक्षर एवं एमओयू प्राप्त करना तथा निर्माण एवं संचालन के दौरान चरणबद्ध पर्यावरणीय अनुपालन प्रस्तुत करना, क्षेत्र की वनस्पति एवं जीव-जंतुओं का फील्ड सर्वे कर वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर विस्तृत डाटा एवं मेट्रिक्स तैयार करना तथा प्रयुक्त कार्यप्रणाली का उल्लेख करना, परियोजना क्षेत्र में पाई जाने वाली स्थानीय वनस्पति एवं जीव-जंतुओं की प्रजातियों का विस्तृत विवरण तैयार करना, डूब क्षेत्र में आने वाले वृक्षों, वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं की संख्या, घनत्व एवं प्रजातिवार सूची सहित विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को प्रस्तुत करना,
परियोजना के कारण स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों के आवास, प्रजनन एवं प्रवास पर पड़ने वाले प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन रिपोर्ट में सम्मिलित करना और परियोजना के कारण जलवैज्ञानिक (हाइड्रोलोजिकल) परिवर्तनों का मत्स्य संसाधनों, मछलियों की विविधता एवं उनके प्रजनन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करना शामिल है। ज्ञात हो कि बांध से डूब आने के कारण लगभग 5 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान है।
बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा ने मांग किया है कि बसनिया (ओढारी) बांध का पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाए।उन्होंने बताया कि पर्यावरण प्रभाव आकलन की अधिसूचना 2006 के अनुसार इस रिपोर्ट पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जनसुनवाई आयोजित कर स्थानीय नागरिकों एवं प्रभावितों से पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभावों संबंधी आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे।
राजकुमार सिन्हा
बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ
