गरीबों से खुलेआम वसूली की चर्चानकल से लेकर जाति प्रमाण पत्र तक के लिए मांगी जा रही कथित रिश्वत, आखिर जिम्मेदार कब करेंगे कार्रवाई?
रेवांचल टाइम्स | मंडला/बीजाडांडी
शासन ने लोक सेवा केंद्रों की स्थापना इस उद्देश्य से की थी कि आम नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और सरल तरीके से सरकारी सेवाएं उपलब्ध हो सकें। लेकिन मंडला जिले के बीजाडांडी स्थित लोक सेवा केंद्र को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि यहां बिना पैसे दिए कोई काम समय पर नहीं होता। नकल, जाति प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों के लिए कथित रूप से “रेट” तय हैं। आरोप है कि दोपहर बाद नकल देने से इनकार कर लोगों को अगले दिन आने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि सुविधा शुल्क देने वालों का काम तुरंत कर दिया जाता है।
हर काम का ‘रेट’ तय होने के आरोप
सूत्रों के अनुसार, लोक सेवा केंद्र में नकल के लिए कथित रूप से ₹200 से ₹500 तक तथा जाति प्रमाण पत्र के लिए ₹500 से ₹1200 तक की मांग की जाती है। आरोप है कि अधिक राशि देने वालों का प्रमाण पत्र अगले ही दिन तैयार कर दिया जाता है, जबकि कम राशि देने वालों को कई दिनों या सप्ताह तक इंतजार कराया जाता है। यदि कोई पैसा देने से इनकार करे तो उसका आवेदन लंबे समय तक लंबित रखने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
पीड़ित का दावा—”500 रुपये मांगे, विरोध किया तो कहा काम नहीं होगा”
रेवांचल टाइम्स को एक शिकायतकर्ता ने फोन पर बताया कि जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उससे ₹500 की मांग की गई। जब उसने इसका विरोध किया तो कथित रूप से उसे कहा गया कि “फिर आपका काम नहीं होगा।” शिकायतकर्ता ने यह भी अनुरोध किया कि उसकी पहचान सार्वजनिक न की जाए, क्योंकि उसे डर है कि भविष्य में उसका कोई भी सरकारी काम प्रभावित हो सकता है।
आदिवासी जिले में गरीबों पर अतिरिक्त बोझ
मंडला आदिवासी बाहुल्य जिला है। यहां अधिकांश लोग सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, शिक्षा, रोजगार और राजस्व संबंधी कार्यों के लिए जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र पर निर्भर रहते हैं। यदि इन सेवाओं के बदले अवैध वसूली के आरोप सही हैं, तो सबसे अधिक नुकसान गरीब, किसान, छात्र और आदिवासी परिवारों को उठाना पड़ रहा है।
जांच की जरूरत, ताकि सच सामने आए
यदि बीजाडांडी लोक सेवा केंद्र में वाकई अवैध वसूली का खेल चल रहा है, तो जिला प्रशासन, लोक सेवा प्रबंधन विभाग और संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। सीसीटीवी फुटेज, आवेदन रजिस्टर, सेवा प्रदाय समय और शिकायतकर्ताओं के बयान की जांच से सच्चाई सामने आ सकती है। दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि लोक सेवा केंद्र वास्तव में “लोक सेवा” का केंद्र बन सके, न कि कथित वसूली का अड्डा।
