दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिले में संचालित चुटका परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर 7 सितंबर 2026 को जबलपुर से प्रकाशित समाचार पर चुटका एवं परियोजना प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे भ्रामक और वास्तविक स्थिति के विपरीत बताया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि कुछ भूमिहीन परिवार पुनर्वास स्थल पर गए हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना गलत है कि परियोजना प्रभावित अधिकांश परिवारों ने गांव छोड़ दिया है या वे परियोजना के लिए अपनी जमीन, जंगल और गांव छोड़ने के लिए तैयार हैं। चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि अधिकांश ग्रामीण आज भी अपने मूल गांवों में रह रहे हैं और उन्होंने अपना गांव, जंगल और जमीन नहीं छोड़ने का संकल्प दोहराया है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ परिवारों के पुनर्वास स्थल पर जाने को समस्त प्रभावित परिवारों के विस्थापन अथवा परियोजना के समर्थन के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से गलत है। ग्रामीणों के अनुसार, चुटका परमाणु ऊर्जा परियोजना के समर्थन में ग्रामवासियों की कोई सामूहिक सहमति या निर्णय नहीं हुआ है। इसलिए समाचार में विस्थापितों को राहत मिलने और परियोजना पर काम शुरू होने की तैयारी को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, उससे यह गलत संदेश जा रहा है कि प्रभावित ग्रामीण परियोजना को स्वीकार कर चुके हैं। परियोजना प्रभावित परिवारों का कहना है कि चुटका केवल रहने की जगह नहीं है, बल्कि उनकी जमीन, जंगल, जलस्रोत, सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान और आजीविका से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों ने कहा कि वे किसी व्यक्तिगत मुआवजे या आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने जीवन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा के लिए परियोजना का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों ने परमाणु परियोजना से जुड़े विकिरण, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी संभावित जोखिमों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इन प्रभावों का स्वतंत्र और समुचित आकलन तथा ग्रामीणों को पूरी एवं पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है। प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधियों ने 8 सितंबर को मंडला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रकाशित समाचार की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि कुछ भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास स्थल पर जाने को पूरे प्रभावित समुदाय के विस्थापन अथवा परियोजना की स्वीकृति न माना जाए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि गांव, जंगल और जमीन नहीं छोड़ने के उनके सामूहिक संकल्प तथा ग्रामसभा एवं ग्रामीणों की आपत्तियों को आधिकारिक अभिलेख में दर्ज किया जाए। साथ ही ग्रामीणों की स्पष्ट और स्वतंत्र सहमति के बिना ऐसी कोई कार्रवाई न की जाए जिससे उनके अधिकार प्रभावित हों।
प्रभावित परिवारों ने परमाणु परियोजना से संबंधित पर्यावरणीय, स्वास्थ्य, विकिरण और सुरक्षा जोखिमों की पारदर्शी जानकारी ग्रामीणों को उपलब्ध कराने तथा उनकी आपत्तियों पर सार्वजनिक संवाद की व्यवस्था करने की मांग की है।कलेक्टर मंडला की अनुपस्थिति में डिप्टी कलेक्टर सचिन जैन प्रभावितों से मिलने आए और ज्ञापन लिया। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि आपका ज्ञापन उचित स्तर पर पहुंचा दिया जाएगा। ज्ञापन देते समय चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष के अध्यक्ष दादु लाल कुङापे, चुटका संघर्ष समिति महिला मोर्चा की अध्यक्ष मीरा बाई मरावी, प्रकाशनार्थ, बराती लाल बरकङे,दयाल सिंह काकोङिया, डूमारी लाल बरकङे,वेद प्रकाश यादव, लखन बर्मन, सोना बाई बरकङे, गौरा बाई तिलगाम, मुन्नी बाई काकोङिया, भागवती बाई कुङापे, सेववती तेकाम, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन जबलपुर के विवेक अवस्थी, बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा, सरमन रजक आदि शामिल थे।
दादु लाल कुङापे ( 9424305836)
अध्यक्ष
चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति
