“विजयनगर मार्ग पर मौत का डिवाइडर – रोजाना हादसे, “सुस्ती से चल रहा काम, तेज़ी से बढ़ रहे हादसे – कब जागेगा प्रशासन?”

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“विजयनगर मार्ग पर मौत का डिवाइडर – रोजाना हादसे, “सुस्ती से चल रहा काम, तेज़ी से बढ़ रहे हादसे – कब जागेगा प्रशासन?”

सड़क निर्माण में लापरवाही से रोजाना हादसे – विजय नगर मुख्य मार्ग पर हादसों का खतरा, प्रशासन बना मौन दर्शक

रेवांचल टाइम्स, जबलपुर

जबलपुर के उखरी तिराहा एमआर-4 मार्ग से विजय नगर मुख्य मार्ग तक बीते दो महीनों से डिवाइडर निर्माण का काम कछुए की चाल से भी धीमा चल रहा है। हालात यह हैं कि बीच सड़क में अधूरे पड़े डिवाइडर, निकले हुए लोहे के पिलर, बिखरा हुआ मलबा और खुले पड़े गड्ढे रोजाना राहगीरों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

Divider of death on Vijaynagar road – accidents every day, work going on slowly
Divider of death on Vijaynagar road – accidents every day, work going on slowly

रोज हो रहे हादसे

इन खतरनाक हालातों की वजह से आए दिन सड़क पर छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। टू-व्हीलर चालक अक्सर इन गड्ढों और खुले पड़े पिलरों से फिसल जाते हैं, वहीं रात के समय फोर-व्हीलर वाहन सीधे अधूरे डिवाइडर से टकरा जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार रोजाना एक न एक दुर्घटना हो ही रही है, लेकिन प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नदारद

सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि काम वाली जगह पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। न तो वहां बैरिकेड्स लगाए गए हैं, न ही रिफ्लेक्टर और इंडिकेटर। ऐसे में रात के समय यह जगह और भी खतरनाक हो जाती है। अधूरा डिवाइडर और निकले हुए लोहे के एंगल सीधे सड़क पर मौत का जाल बिछाए खड़े हैं।

ट्रैफिक जाम ने बढ़ाई परेशानी

विजय नगर मुख्य मार्ग शहर का व्यस्ततम मार्ग है। आसपास होटल, अस्पताल और बड़े कॉम्प्लेक्स मौजूद हैं। पार्किंग व्यवस्था के अभाव में गाड़ियां सीधे सड़क पर खड़ी कर दी जाती हैं, जिस वजह से रोज शाम को लंबा-लंबा जाम लग रहा है। निर्माण कार्य से पहले ही संकरी हो चुकी सड़क इन दिनों और खतरनाक बन गई है।

Divider of death on Vijaynagar road – accidents every day, work going on slowly
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नागरिकों के बयान

पास में ही पान की दुकान चलाने वाले एक दुकानदार ने कहा –
“मेरी आंखों के सामने रोज सुबह-शाम 3 से 4 हादसे होते हैं। लोग बाइक से फिसल जाते हैं, कोई कार डिवाइडर से टकरा जाती है। रोज एक-एक ईंट रखकर यह डिवाइडर बनाया जा रहा है। इतनी धीमी रफ्तार से काम हो रहा है कि कब पूरा होगा, कोई नहीं जानता।”

वहीं, स्थानीय निवासी ने नाराज़गी जताते हुए कहा –
“यहां रोज़ 24 एक्सीडेंट होते हैं। यही यहां का नज़ारा है। सुबह-शाम दो-दो, तीन-तीन घंटे का जाम लगता है। कोई देखने तक नहीं आता। दुर्घटना होने के बाद भी प्रशासन का कोई आदमी नहीं पहुंचता।”

नागरिकों में गहरा रोष

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हालात प्रशासन और निर्माण एजेंसी की लापरवाही से बने हैं। “हर दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन विभाग बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है। अगर जल्द ही काम को तेजी से पूरा नहीं किया गया और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, तो कोई बड़ी अनहोनी होना तय है।”

जिम्मेदारी से बचता प्रशासन

प्रशासन की चुप्पी और निर्माण कार्य में अनदेखी यह साबित करती है कि सड़क सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार विभाग गंभीर नहीं हैं। शहरवासियों की जान को खतरे में डालकर चल रहे इस निर्माण कार्य को लेकर अब लोगों में गुस्सा और डर दोनों बढ़ रहे हैं।

अब सवाल यह है कि आखिर कब तक ऐसे जानलेवा हालातों में जबलपुर के लोग सफर करेंगे? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?

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