जम्मू और कश्मीर डेस्क: आज के डिजिटल युग में, बच्चे तेज़ी से मोबाइल फ़ोन और इंटरनेट से जुड़ रहे हैं। कम उम्र में ही उन्हें स्मार्टफ़ोन और इंटरनेट की सुविधा मिल जाती है। मासूम और भोले होने के कारण, बच्चे साइबर अपराधियों का आसान शिकार बन रहे हैं। अपराधी पहचान की चोरी, जबरन वसूली, ब्लैकमेल और कभी-कभी मानसिक और शारीरिक शोषण का भी सहारा लेते हैं।
बॉलीवुड से उदाहरण
हाल ही में, अभिनेता अक्षय कुमार ने खुलासा किया कि उनकी 13 वर्षीय बेटी नितारा से ऑनलाइन गेम खेलते समय एक अनजान व्यक्ति ने अश्लील तस्वीरें माँगीं। नितारा ने तुरंत अपनी माँ को सूचित किया और भाग निकली। ऐसे मामले बढ़ रहे हैं और कई मासूम बच्चे साइबर अपराधियों का शिकार हो रहे हैं।
देश में साइबर अपराध तेज़ी से बढ़ रहा है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2023 में बच्चों के खिलाफ अपराध के लगभग 1,77,335 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.2 प्रतिशत अधिक है। 2021 से 2022 तक बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध में लगभग 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
बच्चों के लिए साइबर अपराध के खतरे
साइबर अपराधी सोशल मीडिया, ऐप्स और ऑनलाइन गेम्स के ज़रिए बच्चों को निशाना बनाते हैं। वे बच्चों का विश्वास हासिल करते हैं, उनकी निजी जानकारी इकट्ठा करते हैं और उसका इस्तेमाल पैसे ऐंठने, ब्लैकमेल करने या बैंक खाते हैक करने के लिए करते हैं।
माता-पिता के लिए ज़रूरी सावधानियां
- बच्चों को इंटरनेट और गेम्स के फ़ायदे और नुकसान के बारे में शिक्षित करें: बच्चों को इंटरनेट और ऑनलाइन गेम्स के फ़ायदे और नुकसान समझाएँ।
- सतर्क रहें: माता-पिता को साइबर अपराध के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल और दिल्ली पुलिस साइबर यूनिट की वेबसाइट मददगार हो सकती है।
- बच्चों के व्यवहार पर नज़र रखें: अगर आपको अपने बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दें, तो उनकी ऑनलाइन और ऑफलाइन गतिविधियों पर नज़र रखें।
- खुले विचारों वाला व्यवहार सुनिश्चित करें: बच्चों से उनके ऑनलाइन अनुभवों के बारे में बात करें।
- सेटिंग्स नियंत्रित करें: बच्चों के डिवाइस और ऐप्स पर नज़र रखें, और समय और सामग्री की सीमाएँ निर्धारित करें।
- व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा: बच्चों को व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने और मज़बूत पासवर्ड का इस्तेमाल करने की शिक्षा दें।
अगर आप साइबर अपराध का शिकार हो जाएँ तो क्या करें
अपने बच्चे को आत्मविश्वास सिखाएँ और घटना की तुरंत पुलिस या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर रिपोर्ट करें। स्क्रीनशॉट, संदेश या लिंक जैसी जानकारी सबमिट करें। ज़रूरत पड़ने पर परामर्श लें।
