बैंक की लापरवाही के कारण यूपीएससी परीक्षा छूट गई; उपभोक्ता फोरम ने लगाया ₹7 लाख का जुर्माना; अभ्यर्थी को मिलेगा मुआवज़ा

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Bank's negligence led to missing of UPSC exam; Consumer Forum imposes ₹7 lakh fine; candidate to receive compensation

भारतीय स्टेट बैंक की एक बड़ी लापरवाही एक होनहार छात्र का भविष्य बदल सकती थी। कानपुर का एक युवक यूपीएससी मुख्य परीक्षा सिर्फ़ इसलिए छोड़ गया क्योंकि बैंक उसकी फीस समय पर ट्रांसफर नहीं कर पाया। उपभोक्ता फोरम ने इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है और बैंक पर ₹7 लाख का जुर्माना लगाया है…

भारतीय स्टेट बैंक की एक बड़ी लापरवाही एक होनहार छात्र का भविष्य बदल सकती थी। कानपुर का एक युवक यूपीएससी मुख्य परीक्षा सिर्फ़ इसलिए छोड़ गया क्योंकि बैंक उसकी फीस समय पर ट्रांसफर नहीं कर पाया। उपभोक्ता फोरम ने इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है और बैंक पर ₹7 लाख का जुर्माना लगाया है। यह मामला कानपुर के दिल्ली सुजानपुर निवासी अवनीश वर्मा से जुड़ा है, जिन्होंने 2015 में यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पास की थी और एपीओ (सहायक अभियोजन अधिकारी) मुख्य परीक्षा देने वाले थे। उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक की कृष्णा नगर शाखा में ₹255 का परीक्षा शुल्क जमा किया, लेकिन बैंक ने आयोग के खाते में राशि हस्तांतरित नहीं की।

ऑनलाइन पोर्टल पर भी अपडेट नहीं हो पाया

अवनीश को शुल्क जमा करने की रसीद तो मिल गई, लेकिन आयोग की वेबसाइट पर बैंक विवरण अपडेट नहीं हो सका। बार-बार प्रयास करने पर भी जब शुल्क जमा नहीं हुआ, तो अवनीश को परीक्षा देने से मना कर दिया गया।

बैंकिंग लोकपाल ने भी कोई राहत नहीं दी

अवनीश ने पहले आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल से शिकायत की थी। लोकपाल ने केवल ₹10,000 का मुआवज़ा देने का सुझाव दिया था, लेकिन बैंक ने न तो मुआवज़ा दिया और न ही कोई ठोस कार्रवाई की – केवल औपचारिक माफ़ी मांगी गई।

उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला

बैंक के रवैये से असंतुष्ट अवनीश ने अक्टूबर 2018 में उपभोक्ता फोरम में मामला दायर किया। मामले की सुनवाई के बाद, 3 अक्टूबर 2025 को उपभोक्ता फोरम ने बैंक को दोषी करार देते हुए उसे ब्याज सहित ₹7 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके अतिरिक्त, केस खर्च के रूप में ₹10,000 अतिरिक्त देने को कहा गया है। ब्याज दर 7% प्रति वर्ष होगी, जो केस दायर करने की तिथि से भुगतान की तिथि तक लागू रहेगी।

बैंक कर्मचारियों को चेतावनी

फोरम ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह की लापरवाही अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस आदेश को अन्य बैंक अधिकारियों के लिए भी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

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