Reading:युवा वही होता है, जिसके हाथों में शक्ति, पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं। युवाओं के लिए प्रासंगिक हैं स्वामी विवेकानंद जी के विचार !
युवा वही होता है, जिसके हाथों में शक्ति, पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं। युवाओं के लिए प्रासंगिक हैं स्वामी विवेकानंद जी के विचार !
स्वामी विवेकानंद की कहानियां काफी प्रेरणादायी हैं।
विवेकानंद जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। बाल्यावस्था से स्वामी विवेकानंद को अध्यात्म के प्रति गहन रुचि थी। उनका जन्म पश्चिम बंगाल में कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके पिता संस्कृत और फारसी भाषा के विद्वान थे।
महज 25 वर्ष की आयु में स्वामी जी के पिता सन्यासी बन गए। माता जी देवों के देव महादेव की भक्त थीं। हर समय शिव भक्ति में लीन रहती थीं। अतः विवेकानंद जी को बचपन से ईश्वर में अगाध श्रद्धा थी। स्वामी जी स्वयं प्रतिदिन ईश्वर की भक्ति करते थे।
रामकृष्ण परमहंस जी के संपर्क में आने के पश्चात स्वामी जी मां काली के उपासक बन गए। मां काली की कृपा-दृष्टि से स्वामी जी वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली गुरु बने।
युवाओं को स्वामी जी के विचार जीने की नई राह देते हैं
स्वामी विवेकानंद जी के पदचिन्हों पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल कर सकता है।
अनेक लक्ष्य के पीछे भटकने की जगह एक लक्ष्य तय कर लेना चाहिए। अपने परिश्रम को बहुत अधिक दिशाओं में व्यर्थ न करें। सोच-समझकर एक ही जगह अपनी ऊर्जा लगाएं।
स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल विचार जो आपके जीवन बदल सकते हैं।
जैसा तुम सोचते हो, वैसे ही बन जाओगे। खुद को निर्बल मानोगे तो निर्बल और सबल मानोगे तो सबल ही बन जाओगे।
जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी।
उठो, जागो और तबतक न रुको, जब तक तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते।
यह कभी मत कहो कि ‘मैं नहीं कर सकता’, क्योंकि आप अनंत हैं।
एक समय में एक काम करो, ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकि सबकुछ भूल जाओ।
संगति आप को ऊंचा उठा भी सकती है और यह आपको ऊंचाई से गिरा भी सकती है, इसलिए संगति अच्छे लोगों से करें।
लोग तुम्हारी स्तुति करें या निंदा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांच आज हो या युग में, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो।
सब कुछ खोने से ज्यादा बुरा उस उम्मीद को खो देना जिसके भरोसे हम सब कुछ वापस पा सकते हैं।
जिस प्रकार केवल एक ही बीज पूरे जंगल को पुनर्जीवित करने के लिए पर्याप्त है।
बहुत सी कमियों के बाद भी हम खुद से प्रेम करते हैं, तो दूसरों में एक कमी से कैसे घृणा कर सकते हैं।
Golden Thought of Swami Vivekanand Ji
युवा वही होता है, जिसके हाथों में शक्ति, पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा और आंखों में सपने होते हैं।