
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में सोने और चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर जोरदार चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि कीमती धातुओं के दामों में तेज उछाल से आम आदमी, खासकर मध्यम वर्ग, किसान और मजदूर परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। विपक्ष ने सरकार से मांग की कि कीमतों पर नियंत्रण के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाए जाएं।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने कहा कि बीते एक साल में सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है। इसका सीधा असर शादी-विवाह और पारंपरिक अवसरों पर पड़ रहा है, जहां गहनों की खरीद भारतीय समाज का अहम हिस्सा मानी जाती है। उन्होंने कहा कि महंगाई पहले से ही आम लोगों की कमर तोड़ रही है और अब सोने-चांदी के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने हालात और कठिन बना दिए हैं।
सांसदों ने यह भी कहा कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसान और मजदूर वर्ग के लिए बेटियों की शादी के लिए गहने खरीदना अब बेहद मुश्किल हो गया है। कई परिवार कर्ज लेकर या अपनी बचत तोड़कर इन जरूरतों को पूरा करने को मजबूर हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रही, जबकि यह सीधे तौर पर जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ सवाल है।
चर्चा के दौरान सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में मजबूती और निवेश मांग बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में भी दाम बढ़े हैं। सरकार ने कहा कि वह स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर नीतिगत कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई की आशंका और सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी की बढ़ती मांग ने कीमतों को ऊंचाई पर पहुंचाया है। वहीं, घरेलू स्तर पर आयात शुल्क, रुपये की स्थिति और मांग में तेजी भी कीमतों को प्रभावित कर रही है।
कुल मिलाकर, संसद में उठी इस चर्चा से साफ है कि सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी अब केवल बाजार का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक चिंता का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार आम लोगों को राहत देने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
