घुघरी जनपद की पंचायतों में भ्रष्टाचार का जाल!परसवाह के सचिव वीरू सिंह धुर्वे निलंबित, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर वसूली का आरोप

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स – मंडला/घुघरी।
जनपद पंचायत घुघरी की ग्राम पंचायतों में लंबे समय से चल रही अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच आखिरकार एक कार्रवाई सामने आई है।

ग्राम पंचायत परसवाह के सचिव वीरू सिंह धुर्वे को पदीय दायित्वों के दुरुपयोग, अनियमितताओं और नोटिस का संतोषजनक जवाब न देने पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत घुघरी द्वारा पत्र क्रमांक ज0पं0/2026/1775 जारी कर सचिव वीरू सिंह धुर्वे को निलंबित किया गया। यह कार्रवाई ग्रामीणों द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों और पंचायत कार्यों में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद की गई।


जांच में खुली कई अनियमितताएं
ग्राम पंचायत परसवाह के सरपंच-सचिव के खिलाफ ग्रामीणों की शिकायतों पर जनपद स्तरीय त्रि-स्तरीय जांच दल गठित किया गया था। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच प्रतिवेदन के बिंदु क्रमांक 2, 4 और 6 में सचिव द्वारा पंचायत कार्यों में लापरवाही और वित्तीय नियमों की अनदेखी स्पष्ट रूप से सामने आई।


जांच में यह भी पाया गया कि सितंबर 2023 से सितंबर 2025 तक विभिन्न देयकों के भुगतान में भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर ग्रामीणों से 3000 से 4000 रुपये तक की वसूली की जाती थी, जिसे स्वयं सचिव द्वारा स्वीकार किया जाना बताया गया है।


इसके अलावा पंचायत में स्थायी समितियों और ग्राम सभा की बैठकों का नियमित आयोजन नहीं किया गया, जो पंचायत राज व्यवस्था के मूल प्रावधानों के खिलाफ है।


नोटिस का जवाब भी नहीं बचा सका पद
इन अनियमितताओं के संबंध में जिला पंचायत द्वारा 20 फरवरी 2026 को नोटिस जारी कर सचिव से 24 फरवरी तक स्पष्टीकरण मांगा गया था। सचिव द्वारा लिखित जवाब प्रस्तुत किया गया, लेकिन जांच के दौरान वह संतोषजनक नहीं पाया गया।


जिला पंचायत के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सचिव द्वारा लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और शासन के आदेशों की अवहेलना की गई है, जो मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 का उल्लंघन है। इसी आधार पर उन्हें मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1999 के तहत प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित किया गया है।


घुघरी की पंचायतों में लगातार उठ रहे भ्रष्टाचार के सवाल
गौरतलब है कि जनपद पंचायत घुघरी की कई ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी फर्मों और एजेंसियों के माध्यम से बिल लगाकर सरकारी धन की बंदरबांट किए जाने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।


इतना ही नहीं, इन कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका तक दायर की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक न तो व्यापक स्तर पर जांच कराई गई और न ही कई मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर ठोस कार्रवाई होती दिखाई दे रही है।


कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पंचायतों में इतने लंबे समय से अनियमितताएं चल रही थीं तो जनपद और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां थी?


ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि घुघरी जनपद की सभी ग्राम पंचायतों के वित्तीय लेन-देन और कार्यों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सरकारी योजनाओं में हो रही कथित लूट पर अंकुश लग सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।

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