डिंडौरी कृषि विभाग में चना बीज घोटाला उजागर

Revanchal
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किसानों के हिस्से के बीज पर डाका, फर्जी सूचियों से लाखों की हेराफेरी

32 महीने बाद सामने आया भ्रष्टाचार का संगठित तंत्र

रेवांचल टाइम्स | डिंडौरी: डिंडौरी जिले में कृषि विभाग द्वारा संचालित चना बीज वितरण योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया है। किसानों तक बीज पहुंचाने के नाम पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने ऐसा खेल खेला कि योजना ही धोखाधड़ी में बदल गई। 32 महीने पहले दायर शिकायत की अब जाकर हुई जांच में इस घोटाले की परतें खुली हैं।

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समनापुर विकासखंड में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) एस.एच. अठया के अनुसार वर्ष 2021–22 के दौरान कुल 469.20 क्विंटल चना बीज ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सकुन धुर्वे को वितरण के लिए सौंपा गया। लेकिन उनके बयान में खुलासा हुआ कि उन्हें मात्र 255 क्विंटल बीज ही मिला। बाकी करीब 214 क्विंटल बीज रहस्यमय रूप से गायब है। यह बीज किसानों तक कभी पहुंचा ही नहीं।

योजना के तहत प्रत्येक किसान को 75 किलो बीज देना निर्धारित था, जिसके बदले 775 रुपये कृषक अंश तय था। जबकि वास्तविकता में किसानों को सिर्फ 30 किलो बीज दिया गया और उनसे 900 रुपये तक वसूले गए। यह गरीब आदिवासी किसानों से खुली लूट का मामला बन गया।

अमरपुर विकासखंड में भी भारी अनियमितता सामने आई। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी मानसिंह परस्ते के अनुसार उन्हें 353.25 क्विंटल बीज मिला ही नहीं, बावजूद इसके तत्कालीन उपसंचालक कृषि के दबाव में उन किसानों की फर्जी सूचियां तैयार कर डाली गईं, जिनके नाम पर केवल कागजों में ही बीज वितरण दिखाया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि कृषक अंश के नाम पर 7 लाख 59 हजार रुपये जमा कराए गए, जबकि वास्तविक वितरण ही नहीं हुआ। इन रुपयों के स्रोत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि किसानों को सही तरीके से बीज मिला ही नहीं, तो इतनी बड़ी राशि सरकार के खाते में कैसे आई?

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यह घोटाला किसी एक अधिकारी का नहीं, बल्कि पूरे विभाग में फैले संगठित भ्रष्टाचार तंत्र का परिणाम बताया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के विरोधाभासी बयान, मैदानी अमले की अवैध वसूली और जांच एजेंसियों की 32 महीने की सुस्ती ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

इस घोटाले का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को उठाना पड़ा है। कई किसानों को समय पर पर्याप्त बीज न मिलने से बुवाई अधूरी रह गई, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ और उनकी सालाना आमदनी घट गई। जो किसान सूची में नाम होने के बावजूद बीज से वंचित रहे, वे सरकारी योजनाओं से भी दूर रह गए।

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अब सवाल यह है कि इस मामले में कब सख्त कार्रवाई होगी। किसानों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज हो, उनसे की गई अवैध वसूली वेतन से काटकर किसानों को लौटाई जाए, तथा पूरे जिले में बीज वितरण की भौतिक जांच कराई जाए ताकि सच पूरी तरह सामने आ सके।

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