सगे भाई ने भाई पर कुल्हाड़ी से किया जानलेवा हमला, एक की मौत, पत्नी गंभीर
रिश्तों पर भारी पड़ा भूमि विवाद, परिवार और समाज के लिए बना गंभीर चेतावनी का मामला
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला (नैनपुर)
मंडला जिले के नैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत देल्हा में जमीन के विवाद ने एक परिवार को ऐसी त्रासदी में बदल दिया, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। मामूली संपत्ति विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया और सगे भाई ने ही अपने भाई एवं भाभी पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। इस हमले में भाई की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसकी पत्नी गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उपचाराधीन है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान शिवदयाल जंघेला के रूप में हुई है, जबकि उनकी पत्नी आशा बाई जंघेला गंभीर रूप से घायल हैं। दोनों को नैनपुर सिविल अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने शिवदयाल को मृत घोषित कर दिया। घायल महिला का उपचार जारी है। घटना के समय उनका पुत्र किसी तरह जान बचाकर मौके से भाग निकला, जिससे उसकी जान बच गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों भाइयों के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया और परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। घटना की सूचना मिलते ही नैनपुर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। आरोपी की तलाश एवं कानूनी कार्रवाई जारी है।
जब रिश्ते जमीन से छोटे हो जाएं…
यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। आज भूमि और संपत्ति के विवादों में रिश्तों की अहमियत लगातार कम होती जा रही है। जिन भाई-भाई के रिश्तों को प्रेम, विश्वास और सहयोग का प्रतीक माना जाता था, वहीं अब छोटी-छोटी बातों पर हिंसा और खून-खराबा देखने को मिल रहा है।
तो वही विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पारिवारिक विवादों का समय रहते संवाद, समझौते, पंचायत या कानूनी माध्यमों से समाधान किया जाए, तो ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है। क्रोध के कुछ क्षण पूरे परिवार की कई पीढ़ियों का भविष्य बर्बाद कर देते हैं।
देल्हा की यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कुछ बीघा जमीन की कीमत क्या एक इंसान की जान और पूरे परिवार के उजड़ जाने से भी अधिक हो सकती है? रिश्तों की रक्षा, संवाद और संयम ही ऐसे विवादों का सबसे बड़ा समाधान है। अब आवश्यकता है कि समाज, परिवार और प्रशासन मिलकर ऐसे विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की संस्कृति को मजबूत करें, ताकि भविष्य में कोई परिवार इस तरह की त्रासदी का शिकार न बने।
