जलभराव, गंदगी और दुर्गंध से जूझ रहे किसान-व्यापारी, जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर। शहर की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडी एक बार फिर बरसात के मौसम में बदहाल व्यवस्थाओं के कारण चर्चा के केंद्र में आ गई है। हल्की बारिश के बाद ही मंडी परिसर में जलभराव, कीचड़ और गंदगी का साम्राज्य फैल गया है। वर्षों से दोहराई जा रही इस समस्या के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किए जाने से मंडी प्रबंधन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े होने लगे हैं।
कृषि उपज मंडी, जहां प्रतिदिन हजारों किसान अपनी मेहनत की उपज लेकर पहुंचते हैं और करोड़ों रुपये का कृषि कारोबार होता है, वहीं आज मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बदहाल नजर आ रही है। परिसर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। नालियां गाद और कचरे से भरी पड़ी हैं, जिसके कारण बारिश का पानी निकल नहीं पा रहा है। परिणामस्वरूप थोड़ी सी वर्षा के बाद ही मंडी के अधिकांश हिस्सों में जलभराव और कीचड़ की स्थिति बन जाती है।
मंडी परिसर में फैली गंदगी से उठ रही दुर्गंध के कारण वहां कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा है। व्यापारी, किसान, हम्माल और मजदूर इसी वातावरण में पूरे दिन कार्य करने को विवश हैं। कई स्थानों पर व्यापारियों का सामान खुले में रखा दिखाई देता है, जिस पर बारिश और कीचड़ का सीधा असर पड़ रहा है। किसानों द्वारा लाई गई उपज भी सुरक्षित रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विडंबना यह है कि मंडी परिसर में स्वच्छता के संदेश और स्लोगन तो दिखाई देते हैं, लेकिन धरातल पर हालात इसके बिल्कुल विपरीत नजर आते हैं। नियमित सफाई, कचरा उठाव और जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं किए जाने से हर वर्ष बरसात में यही हालात निर्मित हो जाते हैं। इसके बावजूद स्थायी सुधार की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंडी के रखरखाव और साफ-सफाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि जिम्मेदारी मंडी प्रशासन की है तो वर्षों से चली आ रही इस समस्या का समाधान अब तक क्यों नहीं किया गया? यदि अन्य विभाग भी इसके लिए उत्तरदायी हैं तो उनके स्तर पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही? यह प्रश्न अब केवल व्यापारियों और किसानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम नागरिकों के बीच भी चर्चा का विषय बन चुका है।
मंडी परिसर की बदहाल स्थिति के कारण मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। यदि समय रहते सफाई, जल निकासी और सड़क सुधार जैसे आवश्यक कार्य नहीं कराए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
कृषि उपज मंडी जिले की कृषि अर्थव्यवस्था की धुरी मानी जाती है। ऐसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र की यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि किसानों और व्यापारियों के हितों की अनदेखी का भी संकेत देती है। आवश्यक है कि जिला प्रशासन, मंडी प्रशासन और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से तत्काल निरीक्षण करें, जवाबदेही तय करें तथा स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। अन्यथा यह बदहाली आने वाले समय में मंडी की साख और व्यापार दोनों पर भारी पड़ सकती है।

