रेवांचल टाइम्स मंडला मध्यप्रदेश के मंडला जिला अस्पताल एक बार फिर विवाद और आरोपों के कारण सुर्खियों में आ गया है। यहां इलाज के दौरान एक 57 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में गलत इंजेक्शन लगाए जाने के कारण मरीज की मौत हुई है। इस घटना के बाद अस्पताल में तनाव का माहौल बन गया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर तैनात करना पड़ा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान मंडला निवासी प्रहलाद खरे (57 वर्ष) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार प्रहलाद खरे को शनिवार को गंभीर बीमारी के चलते जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि वे सीएलडी (क्रॉनिक लिवर डिजीज) नामक बीमारी से पीड़ित थे और उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही थी।
इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कर डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था।
परिजनों का आरोप है दरमियानी रात करीब 1 बजकर 30 मिनट पर ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ द्वारा मरीज को एक इंजेक्शन लगाया गया। उनका कहना है कि इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद प्रहलाद खरे की हालत अचानक बिगड़ गई और थोड़ी ही देर में उनकी मौत हो गई।
परिजनों का दावा है कि इंजेक्शन लगाने के बाद मरीज की तबीयत तेजी से बिगड़ी, जिससे उन्हें शक हुआ कि गलत इंजेक्शन लगाए जाने के कारण ही मौत हुई है।
मरीज की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में परिजनों की भीड़ जमा हो गई। परिजनों ने डॉक्टर अंशुल शर्मा पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध किया। उनका कहना है कि अस्पताल में सही तरीके से इलाज नहीं किया गया और लापरवाही के कारण एक व्यक्ति की जान चली गई।
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने शव को उठाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और पोस्टमार्टम किसी दूसरे डॉक्टर की टीम से नहीं कराया जाता, तब तक वे शव नहीं उठाएंगे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन अपने डॉक्टरों को बचाने की कोशिश कर सकता है, इसलिए वे चाहते हैं कि पोस्टमार्टम किसी स्वतंत्र डॉक्टर या विशेषज्ञ टीम से कराया जाए।
घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल प्रशासन ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। काफी देर तक अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी बयान सामने आया है। अस्पताल के आरएमओ (रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर) ने कहा कि मरीज पहले से ही गंभीर बीमारी सीएलडी (क्रॉनिक लिवर डिजीज) से पीड़ित था और उसकी हालत बेहद नाजुक थी। डॉक्टरों ने परिजनों को मरीज को बड़े अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी थी, लेकिन किसी कारणवश परिजन उसे रेफर नहीं करा सके।
आरएमओ के अनुसार मरीज की हालत पहले से गंभीर थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि गलत इंजेक्शन लगाए जाने का आरोप निराधार है। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद मृतक के परिजन काफी आक्रोशित हो गए और उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के साथ अभद्रता की।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कुछ लोगों ने नर्सिंग स्टाफ और ड्यूटी डॉक्टर के साथ मारपीट करने की भी कोशिश की। इस कारण अस्पताल का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया था। हालांकि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई।
इस घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल में आए दिन किसी न किसी प्रकार की शिकायत सामने आती रहती है। कभी मरीजों और डॉक्टरों के बीच विवाद होता है तो कभी अस्पताल स्टाफ के व्यवहार को लेकर शिकायतें उठती रहती हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है कि जिले में कई डॉक्टर अपनी निजी क्लिनिक चलाते है और अस्पताल में आने वाले मरीजों को अपने निजी क्लीनिक में इलाज कराने के लिए प्रेरित करते हैं। आरोप है कि अस्पताल में ठीक से इलाज न कर मरीजों को निजी क्लीनिक में बुलाया जाता है, जहां उनसे फीस वसूली जाती है। इसके अलावा कुछ डॉक्टरों पर यह भी आरोप लगता रहा है कि वे अपने संपर्क की पैथोलॉजी लैब से ही जांच कराने के लिए मरीजों पर दबाव डालते हैं।
कई मामलों में मरीजों का कहना रहा है कि अगर वे किसी अन्य लैब से जांच कराकर रिपोर्ट लाते हैं तो उसे स्वीकार नहीं किया जाता। साथ ही दवाइयों को लेकर भी इसी तरह के आरोप लगते रहे हैं कि डॉक्टर कुछ विशेष मेडिकल स्टोर से ही दवाइयां खरीदने के लिए कहते हैं।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसी शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। इस ताजा घटना ने इन सवालों को फिर से चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। अगर जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर मृतक के परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर अस्पताल की लापरवाही के कारण मौत हुई है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
जिला अस्पताल मंडला में हुई यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है।
