डरो कि आप जबलपुर में रहते हो… छोटी बातें…बड़ी वारदातें : 20 साल से कम उम्र के किशोर कर रहे चाकूबाजी, हत्या और हिंसक झड़पों की घटनाएं — पुलिस का खौफ खत्म?

kaonebroadcast@gmail.com
4 Min Read

डरो कि आप जबलपुर में रहते हो… छोटी बातें…बड़ी वारदातें : 20 साल से कम उम्र के किशोर कर रहे चाकूबाजी, हत्या और हिंसक झड़पों की घटनाएं — पुलिस का खौफ खत्म?

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर

ये कड़वा सच है, ये बड़ी चुनौती है, संत विनोभा भावे की संस्कारधानी जबलपुर…अपराधपुर बनता जा रहा है। पढ़ने-लिखने की उम्र वाले नौजवान हाथ में चाकू लिए घू्म रहे हैं। जरा सी टक्कर होते ही फटाक से चाकू निकालकर ऐसा वार करते हैं कि सामने वाले की जान ही निकल जाती है। पिछले 5 सालों में 20 साल से कम उम्र के किशोरों में आपराधिक प्रवृत्ति तेजी से पनपी है। इसकी वजह पारिवारिक भी हो सकती है, परंतु आसपास के माहौल को भी बरी नहीं किया जा सकता है। बढ़ते अपराधों से हर कोई डरा हुआ है।

छोटी बातें, बड़ी वारदातें

कभी मामूली कहासुनी, कभी घूरने की बात, तो कभी सोशल मीडिया पर स्टेटस को लेकर विवाद— और नतीजा… चाकूबाजी, मारपीट, जानलेवा हमला या हत्या तक। हाल ही की घटनाओं में कई मामले सामने आए हैं जहाँ युवा आपसी रंजिश में खुलेआम चाकू चलाते नजर आए।

Be afraid that you live in Jabalpur… small things… big incidents
Be afraid that you live in Jabalpur… small things… big incidents

रिक्शावाले, ऑटोचालक तक निशाने पर

इन युवाओं की हिंसा केवल दोस्तों या दुश्मनों तक सीमित नहीं रही। अब ये रिक्शा चालकों, ऑटोवालों, दुकानदारों या राह चलते आम नागरिकों तक को धमकाने, मारने या लूटने से नहीं चूक रहे। कुछ मामलों में देखा गया है कि ऑटो का किराया मांगने पर ऑटोचालकों को चाकू मारा गया।

पुलिस का डर नहीं, कानून की धज्जियाँ उड़ती नजर आ रही हैं

जबलपुर पुलिस का इकबाल इन घटनाओं के सामने कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। छोटे अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे पुलिस की मौजूदगी में या थानों से चंद कदम की दूरी पर अपराध को अंजाम देने से नहीं घबराते।

सवाल उठते हैं — क्यों नहीं हो पा रही रोकथाम?

क्या पुलिस गश्त कमजोर है?

क्या सोशल मीडिया पर दहशतगर्दी का प्रचार करने वाले इन युवकों पर नजर नहीं रखी जा रही?

क्या स्कूल-कॉलेजों में गिरते अनुशासन और गुटबाज़ी को रोकने की कोई योजना नहीं है?

क्या नशा, ऑनलाइन गेमिंग और अपराधी फिल्मों का प्रभाव इनकी मानसिकता को जहरीला बना रहा है?

एसपी, थानेदार और खुफिया तंत्र की भूमिका पर सवाल
ऐसे हालात में सबसे बड़ा सवाल ये है कि जबलपुर के एसपी और थाना प्रभारियों की क्या रणनीति है? क्या ये केवल घटना होने के बाद “कार्रवाई की जाएगी” कहकर बच निकलने का बहाना बन गई है?

Be afraid that you live in Jabalpur… small things… big incidents
Be afraid that you live in Jabalpur… small things… big incidents

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

समाजशास्त्रियों के मुताबिक युवाओं में कानून का डर कम होने के पीछे कई कारण हैं:

परिवारिक नियंत्रण की कमी

नशे की आसान उपलब्धता
बेरोजगारी और शिक्षा में गिरावट
सोशल मीडिया पर अपराधियों का महिमामंडन

समाधान क्या है?

  • स्कूलों में काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सत्रों की व्यवस्था..
  • मोहल्लों में सामुदायिक
  • पुलिसिंग..
  • सोशल मीडिया निगरानी सेल..
  • नाबालिग अपराधियों के पुनर्वास के लिए विशेष केंद्र..
  • सख्त और त्वरित कानूनी कार्रवाई..

जबलपुर में युवा अपराधियों की बढ़ती संख्या एक सामाजिक और प्रशासनिक संकट का संकेत है। यह केवल पुलिस या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की चेतावनी है। यदि समय रहते इन युवाओं को दिशा नहीं दी गई, तो यह शहर अपराध का अड्डा बन सकता है — जहाँ उम्र नहीं, हौसला अपराध तय करेगा।

👁️ 0 views Views
Share This Article
Translate »