रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला भूजल संरक्षण को लेकर शासन द्वारा लागू प्रतिबंधों और नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए साजापड़ाव-चारागांव क्षेत्र में नेशनल हाईवे-30 किनारे बोरवेल खनन का कार्य किया जा रहा था। मामले की सूचना मिलते ही राजस्व विभाग की टीम ने देर रात मौके पर दबिश देकर कार्रवाई की और चल रही बोरिंग मशीन को बंद कराते हुए पंचनामा तैयार किया। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार साजापड़ाव चारागांव के समीप नर्मदा बोरवेल की मशीन द्वारा बोरवेल खनन का कार्य किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि वर्तमान में भूजल स्तर में लगातार गिरावट को देखते हुए नए बोरवेल खनन पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लागू हैं तथा इसके लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके बावजूद नियमों को दरकिनार कर खनन कार्य किए जाने की शिकायत प्रशासन तक पहुंची थी।
सूचना मिलते ही राजस्व विभाग का अमला देर रात घटनास्थल पर पहुंचा। अधिकारियों ने मौके पर चल रही बोरिंग मशीन को तत्काल बंद कराया और पूरे मामले की जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग का वाहन भी स्थल पर मौजूद रहा। अधिकारियों ने मशीन संचालकों और संबंधित लोगों से बोरवेल खनन संबंधी अनुमति एवं आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन मौके पर कोई भी वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
तहसीलदार ने बताया कि निरीक्षण के दौरान बोरवेल खनन से संबंधित कोई प्रशासनिक अनुमति या वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। दस्तावेजों के अभाव में नियमानुसार कार्रवाई करते हुए पंचनामा तैयार किया गया है तथा प्रकरण को आगे की कार्रवाई के लिए एसडीएम कार्यालय भेजा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में अंतिम निर्णय और दंडात्मक कार्रवाई एसडीएम स्तर से की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जब शासन भूजल संरक्षण को लेकर लगातार अभियान चला रहा है और बिना अनुमति बोरवेल खनन पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं, तब आखिर प्रतिबंध अवधि के दौरान इस प्रकार का कार्य कैसे संचालित हो रहा था। लोगों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो नियमों की अनदेखी कर और भी कई स्थानों पर अवैध बोरवेल खनन शुरू हो सकता था।
गौरतलब है कि मंडला जिले सहित प्रदेश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। गर्मी के मौसम में जल संकट की स्थिति को देखते हुए प्रशासन द्वारा नए बोरवेल खनन पर निगरानी बढ़ाई गई है। इसके बावजूद कुछ लोग नियमों को ताक पर रखकर बोरिंग कार्य कराने से बाज नहीं आ रहे हैं।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल मशीन जप्त करने या पंचनामा बनाने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि बिना अनुमति खनन कराने वालों की जिम्मेदारी भी तय की जाए। साथ ही ऐसे मामलों की नियमित निगरानी कर दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति भूजल संरक्षण संबंधी नियमों की अवहेलना करने का साहस न कर सके।
फिलहाल राजस्व विभाग की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और सभी की नजर अब एसडीएम कार्यालय द्वारा लिए जाने वाले अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ और भी सख्त प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।
