पानी की उपलब्धता, जल धारण क्षमता और खपत का आंकलन कर युक्तियुक्त तरीके से नियमित और संतुलित पेयजल आपूर्ति करें सुनिश्चित – कलेक्टर नारायन
रेवांचल टाइम्स छिन्दवाड़ा
ग्रीष्मकाल में पेयजल की मांग को देखते हुए कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने गुरुवार को कलेक्टर कार्यालय के मिनी सभाकक्ष में जिले के सभी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की। बैठक में सीईओ जिला पंचायत अग्रिम कुमार, नगर निगम छिंदवाड़ा के आयुक्त, सभी नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री एवं सहायक यंत्री उपस्थित थे।
बैठक के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि ग्रीष्मकाल में नागरिकों को निर्बाध और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्वयं अपने-अपने क्षेत्रों में जल स्त्रोतों की उपलब्धता, जल भंडारण क्षमता तथा प्रतिदिन की खपत का वैज्ञानिक एवं वास्तविक आंकलन करें। इसके आधार पर ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाए जिससे नियमित और संतुलित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
कलेक्टर नारायन ने कहा कि कई स्थानों पर पर्याप्त जल उपलब्ध होने के बावजूद वितरण व्यवस्था में समन्वय की कमी अथवा लापरवाही के कारण नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल उपलब्ध होने के बाद भी लोगों तक समय पर पानी नहीं पहुंचता है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
वितरण व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश – बैठक में पेयजल वितरण तंत्र की दक्षता बढ़ाने, जल आपूर्ति के समय और मात्रा की निगरानी करने तथा शिकायतों के त्वरित निराकरण पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने सभी सीएमओ को निर्देशित किया कि वे अपने क्षेत्रों में नियमित मॉनिटरिंग करें और किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रबंधन संबंधी समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ जाती है, ऐसे में उपलब्ध संसाधनों का युक्तियुक्त उपयोग आवश्यक है। जल संरक्षण और समुचित प्रबंधन के माध्यम से ही सभी क्षेत्रों तक समान रूप से पेयजल पहुंचाया जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों के येलो श्रेणी वाले गांवों पर विशेष फोकस – ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित जल संकट की स्थिति का जायजा लेते हुए कलेक्टर ने पीएचई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे येलो श्रेणी में चिन्हांकित ग्रामों का फील्ड अमले के माध्यम से तत्काल भ्रमण कराएं। इन गांवों में पेयजल की वास्तविक स्थिति, जल स्रोतों की उपलब्धता तथा संभावित समस्याओं का विस्तृत आकलन कर शीघ्र वस्तुस्थिति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए।
उन्होंने कहा कि जिन गांवों में भविष्य में पेयजल संकट की आशंका है, वहां समय रहते वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं ताकि ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
शिकायतों के त्वरित निराकरण पर जोर – कलेक्टर नारायन ने अधिकारियों से कहा कि पेयजल संबंधी शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। टैंकर आपूर्ति, हैंडपंपों की मरम्मत, पाइपलाइन लीकेज और जल स्रोतों के रखरखाव जैसे कार्यों में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने नियमित फील्ड निरीक्षण और सतत निगरानी के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए।
कलेक्टर नारायन ने स्पष्ट कहा कि पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकता के मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आमजन को राहत पहुंचाने के लिए नगरीय निकायों, ग्रामीण विकास विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के पूरे अमले को बेहतर आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
