किसानों के हक पर अपनों का कब्जा! कृषि विभाग की सूची ने खोली पोल NFSM के चना प्रदर्शन में गड़बड़ी का आरोप

Revanchal
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शासकीय सेवा में पदस्थ पत्नी समेत रिश्तेदारों के नाम दर्ज मिला लाभ — RTI से सामने आए दस्तावेज

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला, डिंडौरी/शहपुरा। जिस योजना का मकसद खेतों में पसीना बहाने वाले गरीब और जरूरतमंद किसानों तक सरकारी मदद पहुंचाना था, उसी योजना की लाभार्थी सूची अब कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।


जहाँ किसान कल्याण तथा कृषि विभाग डिंडौरी के तत्कालीन उपसंचालक अश्वनी झारिया के मार्ग दर्शन में सभी विकास खण्डो में पदस्थ अधिकारी कर्मचारी ने भ्रष्टाचार की बहती गंगा में हाथ धोना तो छोड़ पूरी डुबकी लगा ली और अधिकारियों के सैकड़ों किलोमीटर की दूरी निवासरत परिवार जन सगे सम्बधी को सूची में शामिल कर उन्हें लाभ पहुँचा दिया और बेचारे गरीब जिले के किसान केवल योजनाओं का इंतज़ार ही करते रहे कि कब सरकार की सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुँचेगा पर उन्हें पता ही नही था कि योजना आई और बाटी ओर चली गई पर उन जरूरत मंद केवल देखते रह है और उपसंचालक सहित पूरा विभाग खेल कर दिया और विभाग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) के तहत रबी वर्ष 2021-22 में चना प्रदर्शन योजना में वितरित बीज की सूची में ऐसे नाम सामने आए हैं, जिन्हें देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकारी योजना किसानों के लिए थी या विभागीय अधिकारियों के परिवार और रिश्तेदारों के लिए?
RTI के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों में ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी (RAEO) गुमान सिंह चौहान से जुड़े बताए जा रहे कई नाम चना बीज के हितग्राहियों की सूची में दर्ज हैं। इनमें शासकीय सेवा में पदस्थ उनकी पत्नी मौसम, ससुर, साले तथा अन्य रिश्तेदारों के नाम शामिल होने का दावा दस्तावेजों से सामने आता है। जिसे किसान तक पहुंचना था, वह परिवार तक कैसे पहुंच गया?
वही प्राप्त सूची में मौसम (पिता शालिकराम) का नाम दर्ज है। दस्तावेजों में उनके नाम के सामने 1.94 हेक्टेयर धारित भूमि और 6 क्विंटल प्रदर्शन मात्रा दर्ज दिखाई देती है। इसी तरह सूची में फगनीबाई/सुखदेव, रत्तूसिंह/नन्दू, समरूलाल/डुमारी सहित कई नाम दर्ज हैं। दूसरे दस्तावेज में समहर/मगनसिंह, धर्म/नानासिंह और भद्दूसिंह/मानासिंह जैसे हितग्राहियों के नाम दर्ज हैं। दस्तावेजों में कई हितग्राहियों के सामने 1 क्विंटल बीज तथा 0.75 क्विंटल मात्रा के कॉलम भी दर्ज हैं।
सवाल यह है कि क्या विभाग ने इन हितग्राहियों की पात्रता, वास्तविक खेती, निवास और योजना से उनका संबंध भौतिक सत्यापन के बाद सुनिश्चित किया था?
शासकीय सेवा में पत्नी, फिर किसान योजना का लाभ कैसे?
मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि आरोपित सूची में अधिकारी की पत्नी का नाम भी बताया जा रहा है, जबकि उनके संबंध में यह जानकारी सामने आई है कि वे स्वयं उद्यानिकी विभाग में शासकीय सेवा में पदस्थ हैं।
यदि यह तथ्य आधिकारिक अभिलेखों से सत्यापित होता है, तो विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि शासकीय सेवा में पदस्थ व्यक्ति को NFSM के चना प्रदर्शन के लिए हितग्राही कैसे बनाया गया?
वही यह केवल बीज वितरण का मामला नहीं है, बल्कि हितों के टकराव और पद के संभावित दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक प्रश्न बन जाता है।
डिंडौरी में योजना, लाभार्थी दूसरे जिले में? सबसे बड़ा सवाल उन नामों को लेकर है जिनका संबंध डिंडौरी से बाहर बताया जा रहा है। आरोप है कि अधिकारी के रिश्तेदारों के नाम पर भी योजना का लाभ दर्शाया गया, जबकि योजना का उद्देश्य स्थानीय पात्र किसानों तक कृषि सहायता पहुंचाना था।
आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले का गरीब किसान बीज और अनुदान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता रहे और दूसरी तरफ अधिकारियों के रिश्तेदारों के नाम योजना की सूची में दर्ज होते रहें—तो फिर किसान कल्याण का असली लाभार्थी कौन है?
यहां यह भी जांच का विषय है कि सूची में दर्ज प्रत्येक व्यक्ति वास्तव में संबंधित क्षेत्र का कृषक था या नहीं, उसके नाम भूमि दर्ज थी या नहीं, उसने वास्तव में चना प्रदर्शन किया या नहीं और बीज की वास्तविक आपूर्ति किसे और कितनी हुई।
RTI ने खोला मामला, अब विभाग देगा जवाब?
यह मामला किसी अफवाह या मौखिक शिकायत के आधार पर नहीं बल्कि RTI से प्राप्त दस्तावेजों में दर्ज हितग्राही सूची के आधार पर सवालों के घेरे में आया है। दस्तावेजों में हितग्राहियों के नाम, जाति, ग्राम, भूमि क्षेत्रफल, प्रदर्शन मात्रा और आधार संबंधी विवरण तक दर्ज हैं।
अब कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने सीधी चुनौती है—
क्या सूची में दर्ज इन सभी हितग्राहियों का मौके पर जाकर सत्यापन कराया जाएगा? क्या यह जांच होगी कि बीज वास्तव में किसने उठाया?
क्या शासकीय सेवा में पदस्थ पत्नी पात्र थीं? क्या अधिकारी के रिश्तेदारों को योजना का लाभ मिला?
और यदि मिला तो किस अधिकारी की अनुमति और किस सत्यापन के आधार पर? गरीब किसान पूछ रहा—सरकार की योजना में हमारा नंबर कब आएगा?
सरकार किसान कल्याण, कृषि विकास और गरीब किसानों की आय बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित करती है। लेकिन यदि योजनाओं की लाभार्थी सूची में ही अधिकारियों के परिवार और रिश्तेदारों के नाम दिखाई देने लगें, तो जमीनी किसान के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा?
डिंडौरी के किसान का हक किसी अधिकारी के परिवार की जागीर नहीं हो सकता। मामले में निष्पक्ष जांच की जरूरत है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका तय कर रिकॉर्ड में दर्ज लाभ की वसूली से लेकर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई तक की जानी चाहिए।
कृषि विभाग को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि NFSM चना प्रदर्शन योजना में वर्ष 2021-22 में कितने किसानों को बीज दिया गया, किस आधार पर चयन हुआ, कितने क्विंटल बीज वितरित हुआ और कितने हितग्राहियों का भौतिक सत्यापन किया गया।
क्योंकि सवाल सिर्फ कुछ नामों का नहीं है—सवाल उस गरीब किसान के हक का है, जिसके नाम पर योजना बनी थी और जिसके हिस्से का लाभ कहीं कागजों में ही अपनों तक पहुंच गया तो नहीं?

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