वर्षों सेवा के बाद बेरोजगारी की मार, सरकार से मांगा जवाब
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला।मध्य प्रदेश के मंडला जिले सहित पूरे प्रदेश और देश में साक्षर भारत मिशन के तहत कार्यरत रहे शिक्षा प्रेरक आज गहरी बेरोजगारी और उपेक्षा का शिकार बने हुए हैं। कभी गांव-गांव में शिक्षा की अलख जगाने वाले ये प्रेरक अब खुद अपने भविष्य को लेकर असमंजस और संघर्ष की स्थिति में हैं।
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक महिला और एक पुरुष प्रेरक की नियुक्ति की गई थी। इन प्रेरकों ने वर्षों तक ईमानदारी से काम करते हुए साक्षरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें हटा दिया गया।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद इन प्रेरकों को किसी अन्य सरकारी योजना या विभाग में समायोजित नहीं किया गया। परिणामस्वरूप वे आज बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं और उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
प्रेरकों में बढ़ती नाराजगी के बीच अब आवाज उठ रही है कि उन्हें फिर से रोजगार से जोड़ा जाए। सुझाव दिए जा रहे हैं कि प्रत्येक ग्राम में पुस्तकालय खोलकर उसका संचालन इन्हीं प्रेरकों को सौंपा जाए या फिर शासकीय छात्रावासों में अधीक्षक का दायित्व देकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इससे जहां प्रेरकों को रोजगार मिलेगा, वहीं स्कूलों में शिक्षकों को अध्यापन कार्य के लिए अधिक समय मिल सकेगा।
प्रेरकों और ग्रामीणों की मांग है कि सरकार इस गंभीर मुद्दे परछ तत्काल निर्णय लेते हुए साक्षर भारत मिशन के इन “शिक्षा प्रहरी” को फिर से सम्मानजनक रोजगार दे और उनकी सेवाओं का उचित मूल्यांकन करे।
