वन भूमि पर रातों-रात बन रही अवैध सड़क, नर्मदा से रेत उत्खनन की तैयारी!

पीएचई मंत्री के बेटे का नाम उछला, वन विभाग पर मिलीभगत के आरोप

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।
जिले के अंजनिया जगमंडल वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत गुरारखेड़ा के झिरिया टोला में वन भूमि और ग्रामीणों के खेतों को खोदकर बिना अनुमति अवैध सड़क निर्माण का मामला सामने आया है। आरोप है कि नर्मदा नदी से रेत निकालने के लिए जेसीबी से सड़क चौड़ी की जा रही है और मुरुम डालकर घाट तक रास्ता तैयार किया जा रहा है। पूरे मामले में पीएचई मंत्री के बेटे का नाम सामने आने से राजनीतिक हलकों में भी सरगर्मी बढ़ गई है।


दिन में बंद, रात में चालू – माफिया का खेल जारी

वही सूत्रों के मुताबिक कुछ दिन पहले वन विभाग को जानकारी लगने पर काम रुकवाया गया था, लेकिन कार्रवाई सिर्फ चेतावनी तक सीमित रही। अब रेत माफिया दिन की बजाय रात के अंधेरे में सड़क निर्माण कर रहे हैं।

वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
यह पूरा क्षेत्र कक्ष क्रमांक 1596 माधोपुर बीट के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों का आरोप है कि बीट गार्ड और डिप्टी रेंजर से तालमेल कर काम कराया जा रहा है, इसी वजह से कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही।
ग्रामीणों का दर्द “हम मिट्टी लें तो कार्रवाई, माफिया सड़क बनाए तो मौन”

ग्राम खैरी और आसपास के लोगों का कहना है कि वे वर्षों से कछार में खेती करते आ रहे हैं, लेकिन अब ठेकेदारों द्वारा जबरन सड़क बनाई जा रही है। खेतों की मेड़ तोड़ी जा रही है और गांव के भीतर तक रास्ता बनाया जा रहा है। विरोध करने पर उन्हें बताया जा रहा है कि रेत खदान स्वीकृत हो चुकी है और इसमें मंत्री के बेटे का भी हाथ है, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं होगी।

गुड़ा अजनिया वेयरहाउस के पास से मुरुम, और पदमी से रामनगर मुख्य मार्ग नर्मदा तक सीधा रास्ता
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गुड़ा अंजनिया के पास स्थित वेयरहाउस क्षेत्र से ट्रैक्टरों में मुरुम लाकर गड्ढे भरे जा रहे हैं और नर्मदा तक सड़क तैयार की जा रही है, जिससे बड़े पैमाने पर रेत निकासी का रास्ता साफ हो सके।

वन परिक्षेत्र अधिकारी का बयान
वन परिक्षेत्र अधिकारी लतिका तिवारी ने कहा कि रेत खदान की स्वीकृति के कुछ दस्तावेज कार्यालय में जमा कराए गए हैं, लेकिन सड़क निर्माण की अनुमति नहीं दी गई है। यदि वन क्षेत्र में कोई कार्य किया जा रहा है तो तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाएगी। वाहनों की सूची लेकर नियमानुसार शुल्क लिया जाएगा और जंगल को नुकसान पहुंचाने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

बड़ा सवाल
क्या राजनीतिक संरक्षण में हो रहा अवैध उत्खनन?
चेतावनी के बाद भी क्यों नहीं हुई जब्ती और एफआईआर?
वन भूमि पर सड़क बनने तक विभाग अनजान कैसे? और क्यों है

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