दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।
आदिवासी बहुल्य मंडला जिले में किसानों के लिए बनाई गई सिंचाई योजनाएं अब सवालों के घेरे में हैं। करोड़ों अरबों रुपये खर्च कर बनाए गए बांध, नहर और कैनाल आज जर्जर हालत में हैं। निर्माण कार्य पूरा हुए बिना ही इनकी गुणवत्ता की पोल खुलने लगी है, जिससे जल संसाधन विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप तेज हो गए हैं।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के विकास खंड भुआ बिछिया, मोहगांव और घुघरी विकासखंड में कई बांधों और उनसे जुड़ी नहर-कैनाल की हालत इतनी खराब है कि जगह-जगह दरारें, रिसाव और टूट-फूट साफ दिखाई दे रही है। ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि निर्माण के समय ही घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिससे परियोजनाएं शुरू होने से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
विभाग की चुप्पी, ठेकेदारों को खुला संरक्षण
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नहर और कैनाल निर्माण में खामियां साफ दिखाई दे रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। किसानों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की साठगांठ के चलते घटिया निर्माण को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है।
सफाई और मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति
नहरों की नियमित सफाई और रखरखाव के नाम पर भी भारी लापरवाही सामने आ रही है। कई नहरें गाद, कीचड़ और कचरे से भरी पड़ी हैं, जिससे पानी खेतों तक पहुंच ही नहीं पाता। वहीं जर्जर नहरों से लगातार पानी रिसता रहता है, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
किसान बूंद-बूंद पानी को मोहताज
अजनिया, बिछिया, मोहगांव और घुघरी क्षेत्र में कई गांवों के किसान सिंचाई के लिए पानी को तरस रहे हैं। स्थिति यह है कि कहीं पानी की कमी से खेत सूख रहे हैं, तो कहीं अव्यवस्थित नहरों के कारण जलभराव से खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कई गांवों में बदहाल नहरें भुआ बिछिया, अंजनिया, नैनपुर, मोहगांव विकासखंड के करेगांव, मलवाथर और वनियातारा सहित कई गांवों में नहरों की हालत जर्जर बताई जा रही है। वहीं घुघरी विकासखंड के बरवानी बांध सहित कई परियोजनाओं की कैनाल और नहरें बदहाल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में ही गड़बड़ी की गई, जिसके कारण कुछ ही समय में नहरों की हालत खराब हो गई।
जिम्मेदारों पर उठ रहे बड़े सवाल
वही स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का आरोप है कि यदि इन निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच और वित्तीय ऑडिट कराया जाए तो करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। लेकिन अब तक जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों द्वारा कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।
किसानों की मांग जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई
वही क्षेत्र के किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बांध, नहर और कैनाल निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए और विभागीय जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि किसानों के नाम पर खर्च हुए करोड़ों रुपये का हिसाब कौन देगा, और कब तक विभागीय लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी से मंडला के किसान यूं ही परेशान होते रहेंगे?
