मंडला जिला चिकित्सालय बना मौत का अड्डा!आदिवासी-बैगा बहुल्य जिले में गर्भ में ही शिशु की मौत, प्रशासन-विधायक-मंत्री कठघरे में

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी और बैगा बहुल्य मंडला जिले में सरकार भले ही मंचों से “बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं” के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन हकीकत यह है कि ये दावे फाइलों और भाषणों से बाहर निकल ही नहीं पाए। जिला मुख्यालय स्थित चिकित्सालय में गर्भ में ही शिशु की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह अस्पताल अब इलाज का नहीं, लापरवाही और संवेदनहीनता का केंद्र बन चुका है।


परिजनों का सीधा और गंभीर आरोप है कि गर्भवती महिला को समय रहते इलाज नहीं मिला। डॉक्टर और पदस्थ स्टाफ ने स्थिति की गंभीरता को नजरअंदाज किया और पैसे की मांग के बावजूद उपचार नहीं किया गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि शिशु ने गर्भ में ही दम तोड़ दिया। सवाल यह है कि अगर जिला अस्पताल में भी समय पर इलाज नहीं मिलेगा, तो गरीब आदिवासी जाए तो जाए कहां?


घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और जिला चिकित्सालय में जमकर हंगामा हुआ। हालात इतने बिगड़े कि पुलिस को बुलाना पड़ा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पुलिस तो बुला ली गई, पर जिम्मेदारों को कब बुलाया जाएगा?
जिला चिकित्सालय की व्यवस्था लंबे समय से सवालों के घेरे में है। आरोप हैं कि


बिना पैसे इलाज नहीं होता
डॉक्टर और स्टाफ मनमर्जी से ड्यूटी निभाते हैं
गरीब, आदिवासी और बैगा समाज के मरीजों को सबसे ज्यादा उपेक्षा झेलनी पड़ती है, यह सब जिला प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, फिर भी आज तक न तो किसी डॉक्टर पर ठोस कार्रवाई हुई, न ही व्यवस्था सुधारने की ईमानदार कोशिश।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह जिला मंत्री और जनप्रतिनिधियों का क्षेत्र है। इसके बावजूद जिला अस्पताल की हालत बद से बदतर होती जा रही है। सवाल उठता है—


क्या आदिवासी-बैगा समाज की जिंदगी की कीमत इतनी ही कम है?
क्या सरकारी योजनाएं केवल पोस्टर, विज्ञापन और आंकड़ों तक सीमित हैं?
पूर्व में भी जिला चिकित्सालय को लेकर अनेक शिकायतें सामने आईं, लेकिन हर बार मामला फाइलों में दबा दिया गया। आज शिशु की मौत के बाद भी यदि जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संदेश होगा कि सरकार और प्रशासन की संवेदनाएं पूरी तरह मर चुकी हैं।


अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो, दोषी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए और जिला चिकित्सालय की कार्यप्रणाली पर तत्काल प्रभाव से सख्त निगरानी रखी जाए।
वरना यह मान लिया जाएगा कि


आदिवासी-बैगा बहुल्य मंडला जिले में सरकार की सारी व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों में जिंदा हैं, जमीन पर नहीं।

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