अत्याचार राहत योजना में करोड़ों का खेल, आखिर कौन हैं असली गुनहगार कौन?
2018 से 2026 तक चलता रहा खेल, दो करोड़ आठ लाख का फर्जीवाड़ा उजागर,
जांच की आंच में अधिकारी-कर्मचारी एक दूसरे को बचते बचाते आ रहे है नज़र
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला
आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में गरीब, शोषित और अत्याचार पीड़ित आदिवासियों को राहत पहुंचाने के लिए बनाई गई सरकार की अत्याचार राहत योजना में कथित रूप से करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पूरे जिले में हड़कंप मचा हुआ है। जिन पीड़ितों के घावों पर शासन को मरहम लगाना था, उनके हिस्से की राहत राशि पर ही भ्रष्टाचारियों ने हाथ साफ कर दिया।
प्रारंभिक जांच में लगभग 2 करोड़ 8 लाख रुपये के गबन और फर्जी भुगतान की बात सामने आई है।

लिपिक रामफल पदम्
सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विकास विभाग मंडला
वही जानकारी के अनुसार 18 से 20 मामलों में वास्तविक हितग्राहियों को राशि न देकर कथित रूप से अन्य खातों में भुगतान किया गया। सवाल यह है कि आखिर गरीब आदिवासियों के हक का पैसा किसकी जेब में गया? क्या एक बाबू अकेले कर सकता है, करोड़ों का घोटाला?
सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विकास विभाग कार्यालय मंडला में पदस्थ लिपिक रामफल पदम पर लगे गंभीर आरोपों के बाद उन्हें केवल निलंबित कर बिना एफ आई आर किये अभयदान दे दिया जा रहा है, और जांच दबाते हुए भ्रष्ट लिपिक को नैनपुर अटैच किया गया है, लेकिन जिले भर में एक सवाल गूंज रहा है कि क्या कोई एक लिपिक वर्षों तक करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी और स्वीकृति के बिना कर सकता है?
वही सूत्रों के अनुसार यह कथित खेल वर्ष 2018 से लगातार चलता रहा। यदि यह सही है तो फिर इतने वर्षों तक ऑडिट, निरीक्षण और वित्तीय परीक्षण करने वाले अधिकारी क्या करते रहे? क्या किसी ने फाइलें नहीं देखीं या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गईं? और लिपिक रामफल पदम् को मनमानी करने छोड़ दिया गया और आखिरकार लिपिक ने गरीबों की मदद का पैसा रिश्तेदारों तक कैसे पहुंचा?
आरोप है कि अत्याचार शोषित पीड़ितों के नाम पर मिलने वाली राहत राशि कथित रूप से फर्जी खातों और करीबी नातेदार लोगों तक पहुंचाई गई। यदि जांच में यह तथ्य सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं बल्कि सामाजिक न्याय की अवधारणा पर सीधा हमला माना जाएगा। जिन लोगों के साथ वास्तव में शोषण अत्याचार अन्याय हुआ, क्या उन्हें उनका हक मिला? यदि नहीं मिला तो उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा? लिपिक का सिर्फ निलंबन क्यों? एफआईआर कब होगी? या केवल जाँच के नाम पर हवाली कर फाइल धूल खाते रहेगी।
वही इतने बड़े ग़बन भ्रष्टाचार घोटाला में किये गए वित्तीय अनियमितता के मामले में अभी तक केवल निलंबन की कार्रवाई होना समझ के परे और भी कई सवाल खड़े कर रहा है। जिम्मेदारो से आम जनता पूछ रही है कि यदि दो करोड़ से अधिक की राशि के फर्जीवाड़े के प्राथमिक प्रमाण मिले हैं तो फिर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने में देरी क्यों?
क्या विभाग मामले को अपने स्तर पर दबाने की कोशिश कर रहा है? क्या दोषियों को बचाने का प्रयास हो रहा है? आखिर पुलिस जांच से परहेज क्यों?
जांच हुई तो खुल सकते हैं कई बड़े नाम
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि स्वतंत्र एजेंसी, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ या विशेष जांच दल द्वारा पूरे प्रकरण की गहराई से जांच की जाए तो फर्जीवाड़े का आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है। चर्चा है कि यह मामला सिर्फ दो करोड़ आठ लाख तक सीमित नहीं है और कई अन्य भुगतान भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
संभागीय उपायुक्त जनजाति कार्य विकास विभाग जबलपुर के संभागीय कार्यालय जबलपुर ने मामंले संज्ञान में लिया एव आरोप पत्र देकर केबल निलबंन कर कार्यवाही की इतिश्री कर ली।
ग्वालियर की ऑडिट टीम ने खोला घोटाला का राज
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी ग्वालियर से महालेखागार से मंडला पहुँची आडिट टीम ने पाया की उक्त ऑनलाइन खातों में किये भुगतान पर विसंगतियां है जो 6 माह पूर्व में किये आडिड मे पाया कि लगभग 2 करोड़ 8 लाख रुपये में हेराफेरी की जानकारी निकल कर सामने आई और लिपिक रामफल पदम के द्वारा आडिट टीम के सामने हुए घोटाला को स्वीकारा भी जाने की बात सामने आ रही हैं।
पीड़ितों को ऑफ लाईन हुए भुगतान की भी होनी चाहिए जाँच
वही अगर उक्त योजना की सुक्ष्मता से जाँच वर्ष 2018 के पूर्व में इस योजना से पीड़ित लोगों को आफ लाईन भुगतान किए जाते थे जांच टीम 2018 से ऑफ लाईन खातों में की जांच की जाए तो राशि दो करोड़ से आठ के ऊपर तक जानी की सम्भवना जताई जा रही कुछ वही पीड़ित लोगो और विभाग ने नवावत साफ निष्पक्ष छवि वाले कलेक्टर से निवेदन किया है कि इस मामंले कि निष्पक्षता एव सुक्ष्मता से जांच लिपिक एव जिन जिन दिनांकों में रहे पदस्थ सहायक आयुक्त की भी जांच होनी चाहिये।
लिपिक रामफल पदम् को कौन कौन अधिकारी ने दिया संरक्षण
वही सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विकास विभाग कार्यालय मंडला में पदस्थ रामफल पदम् ने जिन जिन सहायक आयुक्त से गठबंधन कर जो फर्जीबाडे कर अपने और अपने रिश्ते नातेदारों के खातों में जो राशि डाली गई है, और उन्हें कुछ कमीशन देकर शेष पैसे वापस ले लिए जाते थे और उस पैसों से अनाब शानाब चल आँचल सम्पति क्रय की जाने की जाने की जानकारी प्राप्त हुई जहा आलीशान महल की तरह मकान और नेशनल हाइवे तीस में ढाबे और खेती की भूमि वाहन आदि क्रय किये जाने की जानकारी प्राप्त हुई जिसकी जांच होना आवश्यक है जिससे भ्रष्ट और भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारि कर्मचारियों को सबक मिल सकें और पीड़ित शोषित लोगो को न्याय मिल सके।
कलेक्टर से जनहित में मांग
पूरे मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए। सभी संदिग्ध भुगतान और खातों की फॉरेंसिक जांच हो। दोषी पाए जाने वाले लिपिक रामफल पदम पर एफआईआर दर्ज हो।
फर्जी तरीके से राशि प्राप्त करने वालों से वसूली की जाए। वास्तविक पीड़ितों को तत्काल उनका मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि जनता को सच्चाई पता चल सके।
जनता पूछ रही है…
गरीब आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनी योजना में यदि वास्तव में करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ है तो यह सिर्फ सरकारी धन का नुकसान नहीं बल्कि उन पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय है जिनके नाम पर यह राशि स्वीकृत हुई थी।
अब पूरा जिला जवाब चाहता है—
गरीबों के हक का पैसा किसने खाया?
कौन-कौन इस खेल में शामिल था?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?
वही क्या इस पूरे ग़बन वित्तीय अनिम्मिता और शासन की राशि हड़प करने वाले भ्रष्ट लिपिक के मामले की जाँच उच्चस्तरीय या फिर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो जबलपुर को जाँच सौपी जायेगी या फिर यू ही चलता रहेगा। देखना बाकी हैं।
