स्वास्तिक हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप — गलत खसरा नंबर दिखाकर नक्शा स्वीकृत, नियमों की उड़ाई धज्जियाँ!

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Serious allegations against Swastik Hospital – Map approved by showing wrong Khasra number, rules flouted!

🔸 अवैध निर्माण, रास्ता बंद, पार्किंग नदारद — नागरिकों का जीवन संकट में

🔸 प्रदूषण फैलाने वाले कम्प्रेशर व मशीनें सार्वजनिक मार्ग पर, बुज़ुर्गों को हो रही परेशानी

🔸 टाउन एंड कंट्री, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और शासन से जांच की माँग

रेवांचल टाइम्स विशेष रिपोर्ट जबलपुर

विजयनगर थाना क्षेत्र के आई.टी.आई रोड स्थित स्वास्तिक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अस्पताल के संचालकों — अशोक साहू, संतोष साहू और कृष्ण कुमार साहू — पर आरोप है कि उन्होंने गलत खसरा नंबर दर्शाकर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से नक्शा स्वीकृत कराया और फिर पूरी तरह से अन्य भूमि पर निर्माण कार्य कर दिया।

Serious allegations against Swastik Hospital – Map approved by showing wrong Khasra number, rules flouted!
Serious allegations against Swastik Hospital – Map approved by showing wrong Khasra number, rules flouted!

मामला क्या है

वर्ष 2011 में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग, जबलपुर ने खसरा नंबर 202/3 और 204/16 पर भवन निर्माण की स्वीकृति दी थी।
लेकिन, अस्पताल प्रबंधन ने निर्माण खसरा नंबर 202/11 और 204/34 पर कर लिया — जो पूरी तरह से अवैध माना जा रहा है।
राजस्व अभिलेखों में यह भूमि श्रीमती दुर्गेश साहू पति जयराम साहू एवं स्व. प्यारेलाल साहू के नाम दर्ज है, परंतु अस्पताल संचालकों ने गलत विवरण देकर सरकारी अधिकारियों को भ्रमित किया और अनुमति हासिल कर ली।

स्वीकृत नक्शे का उल्लंघन — फायर सेफ्टी मार्ग तक गायब

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों के अनुसार अस्पताल जैसी गैर-आवासीय इमारतों में चारों ओर 6 मीटर खुला स्थान एवं फायर सेफ्टी एक्सेस रोड अनिवार्य होता है।
लेकिन स्वास्तिक हॉस्पिटल में न तो सेफ्टी मार्ग छोड़ा गया है, न ही पार्किंग की कोई व्यवस्था की गई है।
नगर निगम की “भवन शाखा” ने वर्ष 2011 में ही अस्पताल को म.प्र. नगर पालिका अधिनियम, 1956 की धारा 307(2) के अंतर्गत नोटिस जारी किया था, जिसमें लिखा था कि

“स्वीकृति से अतिरिक्त एवं प्रयोजन विरुद्ध निर्माण किया गया है, भवन अस्पताल उपयोग हेतु उपयुक्त नहीं है।”

फिर भी, नगर निगम ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की।

रास्ता बंद, प्रदूषण बढ़ा — शिकायतकर्ता का आवागमन अवरुद्ध

शिकायतकर्ता एडवोकेट दीपांशु साहू ने बताया कि

Serious allegations against Swastik Hospital – Map approved by showing wrong Khasra number, rules flouted!
Serious allegations against Swastik Hospital – Map approved by showing wrong Khasra number, rules flouted!

“हमारे घर (मकान क्रमांक 3047/202) से निकलने का रास्ता स्वास्तिक अस्पताल के बाजू से होकर जाता है। पिछले 25 वर्षों से यही हमारा नियमित मार्ग है।”

अस्पताल संचालकों ने इस सार्वजनिक मार्ग पर भारी ए.सी. कम्प्रेशर, गैस यूनिट व मशीनें लगा दी हैं, जिससे आवागमन बंद हो गया है।
इन मशीनों से ध्वनि एवं वायु प्रदूषण भी फैल रहा है।
स्थानीय बुज़ुर्गों के अनुसार

हमारे बच्चे सुबह स्कूल जाते समय मुंह में रुमाल रखना पड़ता हैं, आवाज मशीनों की घर तक नहीं नहीं आती हमारा घर पीछे है लेकिन स्वास्तिक हॉस्पिटल के बाजू से रास्ता है जो नाले जैसा कर दिया हे हम लोगों ने कई बार रास्ता बनाया है लेकिन स्वास्तिक हॉस्पिटल वाले उस रास्ते में काली मिट्टी डाल देते है कि हम लोग गिर जाए और चारों तरफ गंदगी है हम लोग खुद corona या अन्य बीमारी हो जाएं….

कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन

शिकायत में बताया गया है कि अस्पताल द्वारा निम्न अधिनियमों और धाराओं का उल्लंघन किया गया है —

क्रमांक अधिनियम / नियम संबंधित धारा उल्लंघन का स्वरूप

1 म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 धारा 30, 33, 34 स्वीकृत योजना के विपरीत निर्माण
2 म.प्र. भूमि विकास नियम, 1984 नियम 31, 42, 43 खुला स्थान और फायर मार्ग न छोड़ना
3 भारतीय न्याय संहिता, 2023 धारा 318, 336, 338, 340 धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज का उपयोग
4 वायु (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 धारा 21, 22 बिना अनुमति प्रदूषण फैलाना
5 Noise Pollution (Regulation & Control) Rules, 2000 नियम 3, 4 आवासीय क्षेत्र में अधिक शोर स्तर

आग लगने की स्थिति में बड़ा हादसा संभव

अस्पताल परिसर में मुख्य द्वार पर वाहनों की पार्किंग व मशीनें लगी हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों और नागरिकों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है।
अग्निशमन विभाग के नियमों के अनुसार यह स्थिति “Fire & Life Safety Norms” के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आती है।

शिकायत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक पहुँची

शिकायत की प्रतिलिपियाँ प्रधानमंत्री कार्यालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, आयुक्त, कलेक्टर, नगर निगम, टाउन एंड कंट्री, और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित 11 विभागों को भेजी गई हैं।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि —

  1. स्वीकृत नक्शे और वर्तमान निर्माण की जाँच कराई जाए।
  2. अवैध निर्माण को निरस्त / ध्वस्त किया जाए।
  3. बंद रास्ते को तुरंत खुलवाया जाए।
  4. प्रदूषण फैलाने वाली मशीनों को हटाया जाए।
  5. दोषियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318, 336, 338, 340 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  6. जांच पूरी होने तक अस्पताल के विस्तार व संचालन पर रोक लगाई जाए।

शिकायतकर्ता का कहना — “यह सिर्फ मेरा नहीं, पूरे मोहल्ले का मामला है”

स्वास्तिक हॉस्पिटल के पीछे सिर्फ हमारा निवास है लेकिन आजू बाजु भी कई परिवार रहते है अगर आग लग जाए तो सभी मुश्किल में आ जायेगे.
एडवोकेट दीपांशु साहू, शिकायतकर्ता

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारियों की निष्क्रियता पर भी गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि —

“यदि किसी भी संस्थान ने स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण किया है, तो अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाती है। ऐसे में अस्पताल का संचालन गैर-कानूनी है।”

अवैध निर्माण पर कार्रवाई न हुई तो बनेगा ‘सिस्टम की नाकामी’ का उदाहरण

स्वास्तिक हॉस्पिटल प्रकरण न केवल नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह है, बल्कि यह आम नागरिकों के जीवन और सुरक्षा से भी जुड़ा मुद्दा है।
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस पर सख्त कदम उठाता है या यह मामला भी फ़ाइलों में दबकर रह जाएगा।

इस मामले पर मुझे कोई जानकारी नहीं है। मुझे सीएमएचओ कार्यालय या कोई भी कार्यालय से कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। अभी तक ना कोई शिकायत आई है…और सीएमएचओ साहब ने सारी चीजों को ओके करके दिया है मुझे की मेरे हॉस्पिटल में कोई भी कमी नहीं है सारे नियमों का पालन में कर रहा हूं।
कृष्ण कुमार साहू, अस्पताल संचालक

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