वैदिक परंपरा के साथ विशेष होलिका दहन, 11वें वर्ष में प्रवेश कर रहा वैदिक परिवार मंडला

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, नगर में वैदिक परिवार मंडला द्वारा आगामी 2 मार्च 2026, सोमवार को शाम 7:30 बजे अग्रसेन चौक, तहसील चौराहा मंडला में विशाल एवं विशेष होलिका दहन समारोह का आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2016 से निरंतर आयोजित हो रहा यह पावन धार्मिक अनुष्ठान इस वर्ष अपने 11वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह का वातावरण व्याप्त है।


हिंदू धर्म में होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक और धार्मिक संदेश का प्रतीक है। यह पर्व भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और सत्य के प्रति अडिग विश्वास की विजय का उत्सव है।

पुराणों के अनुसार जब असुरराज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान की भक्ति से रोकने के लिए अनेक प्रयास किए, तब अंततः होलिका के माध्यम से अग्नि में भस्म करने की योजना बनाई गई। किंतु ईश्वर की कृपा से भक्त प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका दहन हो गई। यह प्रसंग दर्शाता है कि अधर्म, अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित है तथा सत्य, श्रद्धा और भक्ति की सदैव विजय होती है।


होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में किया जाता है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत शुभ और शुद्धिकारक माना गया है। इस दिन अग्नि में आहुतियां देकर व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों—अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष—का दहन करने का संकल्प लेता है। वैदिक परिवार मंडला द्वारा इसी आध्यात्मिक भाव के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण, हवन एवं विधिवत पूजन-अर्चन के साथ होलिका दहन किया जाएगा।

वही इस वर्ष आयोजन की विशेषता यह है कि होलिका की प्रतिमा पूर्णतः गोबर से निर्मित की गई है। भारतीय संस्कृति में गोबर को अत्यंत पवित्र, रोगनाशक और वातावरण को शुद्ध करने वाला माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि गोबर से निर्मित वस्तुएं न केवल पर्यावरण के लिए हितकारी होती हैं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।

प्रतिमा के निर्माण में हवन सामग्री, कपूर, राल, चंदन, महावर आदि का समावेश किया गया है, जिससे दहन के समय वातावरण में सुगंधित और शुद्ध धुएं का प्रसार होगा। प्रतिमा के साथ हजारों कंडों का उपयोग भी किया जाएगा, जो वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।

वही इस वर्ष भी वैदिक परिवार मंडला पिछले दस वर्षों से निरंतर हजारों कंडों के माध्यम से होलिका दहन करता आ रहा है। इस वर्ष गोबर से निर्मित प्रतिमा के माध्यम से एक अभिनव, पर्यावरण हितैषी और सनातन परंपरा आधारित प्रयोग किया गया है, जो धार्मिक आस्था और प्रकृति संरक्षण का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।

प्रतिमा निर्माण में मंडला के बॉटल आर्ट के महारथी त्रिलोक सिंधिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके सहयोग से यह विशेष प्रतिमा भव्य, आकर्षक और आध्यात्मिक आभा से युक्त रूप में तैयार की गई है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
वैदिक परिवार मंडला से जुड़े पंडित ऋषि महाराज ने जानकारी दी कि पूर्णिमा पूजन, होली पूजन एवं होलिका दहन 2 मार्च, सोमवार को ही संपन्न होगा। ग्रहण के कारण 3 मार्च को धुड़ेरी का कार्यक्रम नहीं किया जाएगा, बल्कि यह आयोजन 4 मार्च, बुधवार को संपन्न होगा।

आयोजन समिति ने नगर के समस्त श्रद्धालुओं से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पावन अनुष्ठान में सहभागिता निभाएं तथा धर्म, संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और पर्यावरण संरक्षण के इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में अपना योगदान दें।

वही वैदिक परिवार मंडला द्वारा आयोजित विशेष होलिका दहन समारोह इस वर्ष अपने 11वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 2016 से निरंतर हजारों कंडों के माध्यम से संपन्न हो रहा यह आयोजन मंडला की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बन चुका है।
इस वर्ष गोबर से निर्मित होलिका प्रतिमा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सनातन मूल्यों का संदेश दिया जा रहा है।

यह अनुष्ठान बुराई के दहन के साथ-साथ अहंकार, क्रोध और नकारात्मक विचारों के त्याग का भी प्रेरक है।


इनका कहना है,
पूर्णिमा पूजन, होली पूजन एवं होलिका दहन 2 मार्च को वैदिक विधि से संपन्न किए जाएंगे। ग्रहण के कारण धुड़ेरी का कार्यक्रम 4 मार्च (बुधवार) को आयोजित किया जाएगा।


समस्त श्रद्धालुओं से शुद्ध मन एवं श्रद्धा भाव से अनुष्ठान में सहभागी बनने की अपील की गई है।
ऋषि महाराज
पंडित – वैदिक परिवार मंडलावैदिक परिवार मंडला द्वारा आयोजित विशेष होलिका दहन हमारी सनातन परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। 11वें वर्ष में प्रवेश कर रहा यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है।

मैं सभी श्रद्धालुओं से आग्रह करता हूं कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पावन अनुष्ठान में सहभागी
आशीष द्विवेदी
मंडला

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