योजनाएं कागज़ों में सीमित, किसानों को नहीं मिल रहा लाभ — मंडला में विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में
रेवांचल टाईम्स -मंडला। जिले में उद्यानिकी विभाग की निष्क्रियता और योजनाओं के नाम पर दिखावटी गतिविधियाँ अब खुलकर सामने आ गई हैं। कागज़ों में फल-फूल रहे विकास के दावे, ज़मीनी हकीकत में बंजर साबित हो रहे हैं। किसानों का साफ आरोप है कि उद्यानिकी विभाग मंडला में महज़ नाम के लिए सक्रिय है, जबकि योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन कहीं दिखाई नहीं देता।

कागज़ों में “फूल”, ज़मीन पर “सूना खेत”!
सरकार की मंशा है कि किसानों को फल, फूल, सब्ज़ी, और बागवानी फसलों से जोड़ा जाए ताकि उनकी आमदनी बढ़े। मगर मंडला में उद्यानिकी विभाग की लापरवाही ने इस मंशा को मज़ाक में बदल दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिले में न तो नए बागवानी प्रोजेक्ट शुरू हुए, न प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुए, और न ही किसानों को बीज, पौध या सब्सिडी की जानकारी दी जा रही है। नाराज़ किसान, मंडला
विभाग की कार्यशैली पर सवाल — कहाँ खर्च हो रहा बजट?
जनता पूछ रही है —
- आखिर जो करोड़ों रुपये की उद्यानिकी योजनाओं का बजट हर साल जारी होता है, वह कहाँ जा रहा है?
- ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश योजनाएँ सिर्फ़ कागज़ों पर संचालित दिखा दी जाती हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर किसानों को कोई लाभ नहीं मिलता।
- कई स्थानों पर विभाग द्वारा रिपोर्ट में “बाग लगाए जाने” का उल्लेख किया गया है, लेकिन हकीकत में वहाँ खाली ज़मीन और झाड़ियाँ नजर आती हैं।
- जनता की आवाज़: अब चाहिए जवाब, नहीं दिखावा!
- जिले के किसानों और नागरिकों की मांग है कि
- मंडला जिले के हर ब्लॉक और ग्राम स्तर पर उद्यानिकी गतिविधियों की जांच कराई जाए,
- कागज़ी योजनाओं की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए,
- और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन्हें निलंबित किया जाए।
- जन अपेक्षा: खेतों में दिखे फूल, फाइलों में नहीं
- वही मंडला के लोगों का कहना है कि यदि उद्यानिकी विभाग को सही अर्थों में सक्रिय किया जाए, तो जिले में न सिर्फ़ रोज़गार के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि कृषि विविधीकरण से किसानों की आमदनी भी दोगुनी हो सकती है।
- लेकिन फिलहाल विभाग कुर्सी पर सोया है और योजनाएँ फाइलों में दम तोड़ रही हैं।
- अब सवाल यह है — मंडला में योजनाएँ कब फाइलों से निकलकर खेतों में खिलेंगी?
- सरकार को अब यह दिखावा बंद कर उद्यानिकी विभाग को ज़मीन पर उतारना ही होगा, वरना यह विभाग जनता की नज़रों में अविश्वास का प्रतीक बन जाएगा।
