हजारों की पदोन्नति पूरी, आयुष विभाग की 50-60 फाइलें भी नहीं निपटीं; आखिर जिम्मेदार कौन?

Revanchal
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पदोन्नति में असामान्य देरी से कर्मचारियों में नाराजगी, संचालनालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

विनोद दुबे (विशेष संवाददाता)

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर– मध्यप्रदेश शासन द्वारा 20 जुलाई से पहले अधिकांश बड़े विभागों में हजारों अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया पूरी कर ली गई, लेकिन आयुष विभाग में लगभग 50-60 पात्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पदोन्नति अब तक लंबित है। सीमित संख्या होने के बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं होने से विभागीय कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जब बड़े विभाग समय पर पदोन्नति कर सकते हैं, तो आयुष विभाग में आखिर ऐसी क्या बाधा है कि प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी।

देरी के लिए कौन जिम्मेदार?

कर्मचारियों का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया में हुई देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि संचालनालय स्तर पर लापरवाही हुई है, तो अब तक संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

क्या जानबूझकर की जा रही है देरी?

विभागीय कर्मचारियों के बीच यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं पदोन्नति प्रक्रिया में जानबूझकर विलंब तो नहीं किया जा रहा। कर्मचारियों का कहना है कि यदि इस बीच न्यायालय से कोई स्थगन आदेश आ जाता है तो पात्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलने में और देरी हो सकती है। इससे विभाग के भीतर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

प्रभार व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल

विभागीय सूत्रों के अनुसार संचालनालय में लंबे समय से अपेक्षाकृत कम अनुभव वाले तथा छोटे पदों के अधिकारियों-कर्मचारियों को उच्च पदों का प्रभार देकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सूत्रों का कहना है कि सीमित अनुभव के कारण पदोन्नति जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। विभाग के भीतर यह चर्चा भी है कि यदि नियमित पदोन्नति हो जाती, तो प्रभार पर कार्य कर रहे कुछ अधिकारियों को अपने मूल पदों पर लौटना पड़ता। इसी कारण शासन के निर्देशों की भी अनदेखी करते हुए प्रक्रिया में जानबूझकर विलंब किए जाने जैसी आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

विभाग के पात्र अधिकारी एवं कर्मचारी अब राज्य सरकार से पूरे मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया में हुई देरी, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तथा कथित प्रक्रियागत अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कर पात्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनका अधिकार दिलाया जाए, ताकि विभाग में व्याप्त असमंजस और असंतोष की स्थिति समाप्त हो सके।

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